Nios Deled Assignment 508 in Hindi - असाइनमेंट - 1 प्रश्न - 1 का उत्तर


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Nios Deled Assignment 508 in Hindi - असाइनमेंट - 1 प्रश्न - 1 का उत्तर 

प्रश्न - 1. “विद्यार्थियों एवं अध्यापकों के लिए मुखौटा एवं कठपुतली दोनों ही अन्वेषण व प्रयोगीकरण के लिए एक सशक्त माध्यम है,” – इस कथन को स्पष्ट कीजिए l


Q. 1. “Masks and Puppets are both effective methods for Exploration and Experimentation for teachers and students”. Explain the statement.
Nios Deled Assignment 508 in Hindi
उत्तर - यदि एक बच्चा को सृजनात्मक वातावरण दिया जाये जहाँ उसे प्रयोग करना और अन्वेषण करना स्वीकृत है तो अधिगम एक साकल्यवादी विकास उपलब्ध कराएगी l बच्चा स्वतंत्र पूर्वक सोचना, अपने वातावरण और विश्व के बारे में जानना, प्रयोग को सीखना और संभावनाओं का अन्वेषण करना सीखेगा l चाहे विद्यार्थी हो या शिक्षक सभी यथार्थ ज्ञान को प्रत्यक्ष अनुभव में उद्भूत भी करेंगे l अतः मुखौटा एवं कठपुतली दोनों ही विद्यार्थियों एवं अध्यापकों के लिए अन्वेषण और प्रयोगीकरण के लिए बहुत ही अच्छा माध्यम है जहाँ से विद्यार्थी और शिक्षक दोनों ही यथार्थ ज्ञान की खोज करते हैं l


मुखौटा एवं कठपुतली से अन्वेषण एवं प्रयोगीकरण किस प्रकार होता है उन्हें हम नीचे विस्तार से समझते हैं –
1. मुखौटा :- यह सामान्यतः चहरे पर पहना जाता है और छद्मवेश धारण करने और मनोरंजन दोनों के लिए प्रयुक्त किया जाता है l मुखौटा विभिन्न उत्सवों या कहानी कहने आदि के लिए प्रायः चेहरे पर पहना जाता है l एक कागज़ की प्लेट, कुछ पंख, कुछ छोटे चमकीले प्लेट आदि वास्तव में एक अच्छा मुखौटा बनाते हैं l बच्चे विभिन्न सामग्रियों का अन्वेषण और अपनी कल्पना का प्रयोग मुखौटा सृजन के लिए करते हैं l कुछ प्रकार के मुखौटा प्राथमिक बच्चों के लिए उपयुक्त सामग्रियों से बनाये जा सकते हैं जो इस प्रकार हो सकते हैं – 

कागज का मुखौटा :- हम मुखौटा निर्माण के लिए किसी भी कागज का प्रयोग कर सकते हैं l बच्चे चरित्र के अनुसार रेखा खींचकर काटते हैं और फिर उनमें कुछ गुण जोड़ देते हैं l आकृति बनाने के लिए विभिन्न रंग के कागज़ और सजावट के लिए विभिन्न सामग्रियों को अपनाया जाता है l
कागज के थैले का मुखौटा :- यह बनाने में बहुत आसान होता है l इसे बनाने के लिए एक बड़ा लिफाफा या कागज का थैला लिया जाता है जिसमें बच्चे का सर समा सकता है l थैला के ऊपर देखने के लिए आँख, साँस लेने के लिए नाक और बोलने के लिए मुंह को चिन्हित कर उपयुक्त छेद बनाया जाता है l बच्चे अपनी कल्पना शक्ति से उसे पेंट करते हैं l और इस प्रकार बना मुखौटा देखकर कोई भी आश्चर्यचकित हो जाता है l
कागज की प्लेट के मुखौटे :- ये भी बनाने में बहुत आसान होते हैं l बच्चे इसे बनाकर खेलते हैं l इसे बनाने के लिए एक प्लेट लेकर अंडाकार आकार में उसे काटते है, देखने के लिए छिद्र करते हैं और प्लेट के दोनों किनारे पर रबर लगाकर इसे पहन लेते हैं l खेलने के लिए और आकर्षक बनाने के लिए रंग-पेंट भी कर देते हैं l

पेपर मैसी (कुट्टी) के मुखौटे :- ये मुखौटे कागज की लुग्दी या कागज को गीला कर गेंहूँ की लेई से बनाये जाते हैं l इस सामग्री से कोई भी चेहरे की आकर्षक रुपरेखा बना सकता है l जब यह सूख जाता है तो कठोर और टिकाऊ हो जाता है l चरित्र निर्माण के लिए इसे रंगा भी जा सकता है तथा जरुरत के हिसाब से आधा या पूरा मुखौटा भी बनाया जा सकता है l


2. कठपुतली निर्माण :- कठपुतली एक निर्जीव सादृश्य मूलक जीवित तस्वीर है जिसे एक मनोरंजनकर्ता द्वारा बहुत ही चालाकी से चलाया जाता है l यह रंगमंच का बहुत ही प्राचीन रूप है l बच्चे प्राथमिक स्तर पर अपने आस-पास उपलब्ध सामग्रियों जैसे धागे, कागज के टुकड़े, घास, कागज के थैले, समाचार पत्र, बटन, ऊन, झाड़ू की सींक, पुराने कपड़े या मौजे आदि से कठपुतली बना सकते हैं l बच्चे अपशिष्ट पदार्थ का प्रभावी उपयोग सीखते हैं l स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामग्रियों को चुनने में उत्प्रेरित होते हैं और कृत्रिम या अधिक लागत वाले सामग्री से बचते हैं l बच्चे अधिक अनुपालक होते हैं और नयी वस्तुओं का अन्वेषण करते हैं l कठपुतली बनाने की कुछ सामान्य तकनीकें इस प्रकार हैं –

अँगुली कठपुतली :- बिना अधिक उपकरणों के कठपुतली बनाने का यह सबसे आसान तरीका है l कोई भी अँगुलियों पर कपड़े का टुकड़ा बाँधकर पेंट के द्वारा अंगूठे पर आँख, नाक, मुँह आदि बनाकर एक चरित्र का सृजन कर सकता है और अँगुलियों से विभिन्न चरित्रों को चित्रित कर सकता है l
मोज़े के कठपुतली :- ये कठपुतली मोजों को हाथों में पहन कर बनाया जाता है l आँखें या अन्य गुण के लिए धागे, बटन, पंख, रीबन, शिल्प, मोती, फोन आदि का प्रयोग किया जा सकता है l
  
दास्ताना कठपुतली :- दास्ताना कठपुतली कपड़ों के दो टुकड़ों को एक साथ जोड़कर अच्छी तरह बनाया जाता है जिससे अन्दर खोखलापन हो ताकि अंगुलियाँ और हथेली उसमें अन्दर जा सके l
इस प्रकार हम देखते हैं कि मुखौटा और कठपुतली बनाने के जितने भी तकनीकें हैं सभी में कुछ न कुछ अन्वेषण और कई प्रकार के प्रयोग करने के अवसर समाहित हैं l इसलिए यह विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए अन्वेषण और प्रयोगीकरण का सशक्त माध्यम हैं l

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