NIOS DELED ASSIGNMENT 507 IN HINDI-ASSIGNMENT-1 QUESTION-1

Chandan 1:47 pm
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NIOS DELED ASSIGNMENT 507 IN HINDI-ASSIGNMENT-1 QUESTION-1 - Explain the socio cultural components that influence the education system and the influence of community on the cultural development of the learners.

प्रश्न -1. शिक्षा-प्रणाली को प्रभावित करने वाले सामाजिक-सांस्कृतिक घटकों तथा शिक्षार्थियों के सांस्कृतिक विकास में समुदाय के प्रभाव की व्याख्या कीजिये l 


507 ASSIGNMENT -1 QUESTION 1
उत्तर - समुदाय, विद्यालय और शिक्षक से बच्चों के माध्यम से सामाजिक आकांक्षाओं एवं अपेक्षाओं को अनुभूत करने की अपेक्षा करता है l इस तरह से समुदाय, विद्यालय और शिक्षक या यूँ कहें कि पूरे शैक्षिक तंत्र को प्रभावित करता है l शिक्षा-प्रणाली को प्रभावित करने वाले सामाजिक-सांस्कृतिक घटकों में निम्न चीजें शामिल हैं –

1. सामुदायिक संघटन :- समुदाय का संरचनात्मक संघटन विभिन्न तरीकों से शिक्षा को निश्चित करता है l इस प्रकार विभिन्न जातियों, भाषाओँ, धर्मों और पंथों वाली विजातीय जनसंख्या वाला एक समुदाय उस समुदाय में शिक्षा-प्रणाली के लिए एक चुनौती पैदा कर सकता है या विविध जनसंख्या उपसमूहों के बीच आपसी संबंधों और सामंजस्य पर निर्भर प्रणाली को समृद्ध कर सकता है l श्रेणीबद्ध जाति या सामाजिक आर्थिक प्रणालियाँ, शिक्षा-प्रणाली से निम्न जाति या गरीब लोगों का बहिष्कार करने में नेतृत्व कर सकती है l अल्पसंख्यक पंथ या धार्मिक समूहों के प्रति मनोवृतियाँ इन समूहों की शिक्षा को प्रभावित कर सकती है l समुदाय में बोली जाने वाली भाषा विद्यालय में निर्देश के माध्यम में एक भूमिका निभाएगी l


2. व्यावसायिक एवं आर्थिक घटक :- गरीबी जीवन के लिए अन्य प्रतिस्पर्धी जरूरतों के कारण बहुत से बच्चों की शिक्षा को रोक सकती है l लोग शिक्षा पर खर्च करने में सक्षम नहीं हो सकते या अपने बच्चों को विद्यालय की जगह काम के लिए भेजने को प्राथमिकता दे सकते हैं l

3. रीतियाँ, परम्पराएँ और विश्वास :- परम्पराएँ और रीतियाँ समुदाय पर आधारित होती है और इसके विश्वास को आकार देती है जो समुदाय के बच्चों में शिक्षा को प्रभावित कर सकती है l उदहारण के लिए – एक समुदाय की मान्यता है कि अशक्त बच्चे, उनके या उनके अभिभावकों द्वारा पूर्व जन्म में किये गए पापों के कारण ईश्वर द्वारा दण्ड के परिणाम हैं l ऐसे समुदाय, अशक्त बच्चों की शिक्षा को कर्म में हस्तक्षेप मान सकते हैं l ये बच्चे और उनके परिवार शिक्षा प्रणाली से कलंकित और बहिष्कृत हो सकते हैं l

4. लैंगिक भेदभाव :- लैंगिक भेदभाव के बारे में समुदाय की मान्यताएँ और कार्य लड़कियों का शुरुआत में ही विद्यालय से बहिष्कार करने में भेदभावपूर्ण हो सकती है l


5. विशेषाधिकार रहित एवं सीमांत समूहों के प्रति मनोवृतियाँ :- समुदाय का उनकी मान्यताओं और शोषणात्मक कार्यों के कारण अशक्त, विशेषाधिकार रहित और सीमांत समूहों के प्रति नकारात्मक मनोवृति हो सकती है जो शिक्षा-प्रणाली में इन समूहों की समुचित भागीदारी को बाधित कर सकती है l जबकि स्थानीय समुदाय की प्रकृति, प्रदान की जाने वाली शैक्षिक सुविधाओं की प्रकृति को प्रभावित एवं निर्धारित करती है l शैक्षिक संस्थाएं भी स्थानीय समुदाय को प्रभावित करती है l

इस तरह से स्थानीय समुदायों एवं शैक्षणिक सुविधाओं के बीच संबंध आपसी एवं अन्योन्याश्रित है l और दोनों ही एक दूसरे को प्रभावित करती है l
 
शिक्षार्थियों के सांस्कृतिक विकास पर समुदाय का प्रभाव :- 

शिक्षार्थियों के सांस्कृतिक विकास में समुदाय एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है l स्थानीय संस्कृति का यदि सूक्ष्मता से अध्ययन किया जाये तो यह अधिगम के अन्य क्षेत्र को प्रदर्शित करता है जो संस्थानात्मक ज्ञान का आधार हो सकता है l

उदहारण के लिए, गाँवों में या जनजातीय समुदायों में ‘माहुल’ के वृक्ष का एक सांस्कृतिक पहलू हैं l इसका सन्दर्भ लोकगीतों, कहानियों और पहेलियों में भी पाया जाता है l यह उनके सामाजिक धार्मिक जीवन के प्रति मजबूती से समर्पित है l यह भी विश्वास किया जाता है कि माहुल वृक्ष में देवी देवताओं का निवास होता है और इसलिए वृक्ष को पूजा जाता है l समुदाय में और भी कई सांस्कृतिक मिथक और आख्यान हैं जिसे बच्चे या तो पहले से जानते हैं l और अगर नहीं जानते हैं तो शिक्षक उन्हें इसका ज्ञान कराते हैं l

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त्यौहार और संस्कृति :- प्रत्येक क्षेत्र या समुदाय के अपने त्यौहार हैं जिनका विस्तार वर्ष भर हैं l कुछ ऐसे भी त्यौहार हैं जिन्हें सभी जातियां या समुदाय मनाते हैं l जैसे- क्रिसमस, दिवाली, दुर्गापूजा, लोहड़ी, बसंत पंचमी आदि l सभी त्योहारों का संबंध, आनंद, प्रसन्नता और ख़ुशी से हैं l प्यार, ख़ुशी, धैर्य और सभी संस्कृति की आदर करने की भावना धर्मनिरपेक्षता को सशक्त करती है l और प्रत्येक दूसरे की संस्कृति से अच्छी बातें सीखने की सकारात्मक मनोवृति विकसित करती है l

खेल और नाट्य कला :- बहुत से पारंपरिक खेल, नृत्य जो पाठ्क्रम से भी जुड़े हैं और विद्यालयी गतिविधियों में भी प्रयोग होते हैं, बच्चों में स्थानीय संस्कृति की समझ और उनके ज्ञान को एक मूल्य प्रदन करता है l यह बच्चों में उनकी अपनी सांस्कृतिक पहचान के प्रति उच्चतर स्वाभिमान भी सृजित करता है l हीनता और स्व अस्वीकृति की भावना को न्यूनतम करता है जो कि व्यक्तित्व के सम्पूर्ण विकास में बहुत सहायक है l

इस प्रकार संस्कृति को अक्षुण रखने में विद्यालय और समुदाय अंतरपृष्ठ सहायता करता है और बच्चों को उनकी संस्कृति का ज्ञान प्राप्त करने में सहायता करता है l

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