Nios assignment 506 in hindi - (सत्रीय कार्य - ll)

Chandan 3:11 pm
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COURSE 506
ASSIGNMENT - ll (सत्रीय कार्य - ll)

Nios assignment 506 in hindi, ASSIGNMENT - ll (सत्रीय कार्य - ll) QUESTION NO. 1

Q.1. उचित उदाहरणों की सहायता से कक्षाकक्ष में अभिप्रेरणा की विविध तकनीकों की व्याख्या कीजिये l 
Describe various techniques of classroom motivation with suitable examples.


ANS.   “अभिप्रेरणा” या मोटिवेशन शब्द का अभिप्राय है एक या अधिक प्रभाव उत्पन्न करने के लिए कार्य करने की प्रवृति जागृत करना l अभिप्रेरणा कार्य को जागृत करने, बनाये रखने व नियंत्रित रखने की प्रक्रिया है l 

कक्षाकक्ष में विद्यार्थियों को अभिप्रेरित करने के लिए शिक्षक द्वारा कई तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है , जिनमें से कुछ प्रमुख तकनीकें निम्नलिखित हैं-
1. आकर्षक भौतिक वातावरण :- शिक्षक को कक्षा के भौतिक वातावरण का ध्यान रखना चाहिए l कक्षा के भीतर व बाहर कोई ध्यान भंग करने वाले कारक नहीं होने चाहिए l शोर, तेज प्रकश व कुछ अवांछनीय नज़ारे धयान भंग करने वाले करक नहीं होने चाहिए l असाधारण तापमान भी परेशानी उत्पन्न करता है l कक्षाकक्ष हवादार व आकर्षक ढंग से सजाए जाने चाहिए l

2. जन्मजात आवेगों का बाहर निकलना :- छोटे बच्चों के अधिकतर व्यवहार जन्मजात आवेगों द्वारा निर्देशित होते हैं l बच्चे स्वाभाव से बड़े जिज्ञासु होते हैं l वे बहुत सारी क्रियाएँ करना चाहते हैं l हर नयी और अजीब वस्तु उन्हें आकर्षित करती है l एक प्रभावी शिक्षक जिज्ञासा के इस आवेग को प्रोत्साहित करेगा l वह नया पाठ हमेशा किसी उसके बहुत ही नए और अजीब पहलू से शुरू करेगा l इसी प्रकार बच्चे कई वस्तुएं बनाना चाहते हैं l शिक्षक को उन्हें नई चीजें बनाने, उनका सर्जन करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए l

3. शिक्षक द्वारा प्रोत्साहन रूपांतर :- यह साधारणतः देखा गया है कि बच्चे एक चीज/क्रिया में लम्बे समय तक ध्यान नहीं दे पाते l शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया की प्रभाविता काफी हद तक शिक्षक के व्यवहार में प्रयोग किये गए प्रोत्साहन रूपांतर पर निर्भर करती है l शिक्षक के व्यवहार में कुछ सामान्य कक्षा में रूपांतर इस प्रकार है –
क) शिक्षक का कक्षा में गति करना 
ख) शिक्षक द्वारा किये गए इशारे 
ग) आवाज के पैटर्न में बदलाव
घ) संवेदना केंद्र में बदलाव 
ड) मुद्रा में परिवर्तन 

4. सुदृढ़ीकरण :- प्रशंसा व निंदा (दोष) l इन्हें इस प्रकार से वर्गीकृत किया जा सकता है –
क) सकारात्मक मौखिक सुदृढ़ीकरण- शिष्य के उत्तर देने के बाद शिक्षक मौखिक रूप से अच्छा, बहुत अच्छा, सही, ठीक है आदि कहकर ख़ुशी का संकेत देता है l 
ख) सकारात्मक गैर-मौखिक सुदृढ़ीकरण- इसमें शामिल है- सर हिलाना, मुस्कुराना, शिक्षक का शिष्य की ओर मैत्रीपूर्ण बढ़ना, देखना, शिष्य के उत्तर को बोर्ड पर लिखना l 
ग) नकारात्मक गैर-मौखिक सुदृढ़ीकरण- इसके अंतर्गत ‘इशारे’ आते हैं जैसे परिहास करना, त्यौरियाँ चढ़ाना, गुस्सा दिखाना, अधीरता दिखाना l  
घ) नकारात्मक मौखिक सुदृढ़ीकरण- इसमें शिक्षक द्वारा इस प्रकार की टिप्पणियां आती है – नहीं, गलत, अच्छा नहीं है, बुरा उत्तर, बिल्कुल नहीं आदि l 

5. बाह्य अधिगम :- पुरस्कार व दण्ड l पुरस्कार चाहे सामग्री के रूप में हो या प्रतीकात्मक या मनोवैज्ञानिक हो, बच्चे के सम्मान, आवश्यकताओं, सुरक्षा आदि की पूर्ति करता है व इन्हें बढ़ावा देता है और इस प्रकार प्रोत्साहन के रूप में कार्य करता है l गरीब बच्चों में सामग्री द्वारा पुरस्कार अधिक प्रभावी होता है जबकि अमीर घर के बच्चों को प्रतीकात्मक पुरस्कार से ख़ुशी मिलती है l 

6. ख़ुशी और दर्द :- व्यवहार के सबसे पुराने सिद्धांत के अनुसार व्यक्ति उन ख़ुशी देने वाले अनुभवों को खीजते हैं जिनसे उन्हें संतुष्टि मिलती है और दर्द भरे अनुभवों से वे दूर भागते हैं l इस सिद्धांत का कक्षा में शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया पर पूरा प्रभाव पड़ता है l शिक्षक को ख़ुशी देने वाले व संतुष्टि प्रदान करने वाले अनुभवों का प्रयोग करना चाहिए ताकि वे आगे सीखने के लिए अभिप्रेरित रहें l 

7. प्राप्त लक्ष्य :- प्रत्येक पाठ में एक लक्ष्य होना चाहिए जहाँ हमें पहुंचना है l तभी विद्यार्थी उस विशेष दिशा में अपने प्रयासों को जारी रख सकते हैं l यह लक्ष्य विद्यार्थियों को स्पष्ट कर दिए जाने चाहिए l 

8. सफलता का अनुभव :- सफलता का अनुभव एक विद्यार्थी को क्रियाकलाप जारी रखने के लिए प्रेरित कर सकता है l इसलिए शिक्षक को स्कूल के कार्य (पाठ्यक्रम संबंधी व सहपाठ्यक्रम संबंधी) इस प्रकार बनाने चाहिए कि उनमें विभिन्नता हो और हर विद्यार्थी को अपने स्तर पर सफलता का अनुभव हो l 

9. प्रतियोगिता और सहयोग :- प्रतियोगिता क्रियाकलाप के लिए एक प्रेरणा है l परन्तु व्यक्तिगत आधार पर प्रतियोगिता असमान हो सकती है और कुछ विद्यार्थियों के लिए खतरनाक हो सकती है l समूहों में प्रतियोगिता से जीत या हार के अनुभव पूरे समूह में बंटने की सम्भावना बना देती है l सहयोग भी प्रेरणा प्रदान करता है क्योंकि यह शिक्षार्थियों सामाजिक परिस्थियाँ प्रदान करता है जहाँ उन्हें सामाजिक स्वीकृति व अपनेपन की आवश्यकताओं की पूर्ति से संतुष्टि मिलती है l 

10. प्रगति का ज्ञान :- विद्यार्थियों को अपनी प्रगति का आभास कि वे किस प्रकार अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं, अभिप्रेरणा का एक प्रभावी रूप है l यह उन्हें अधिक प्रयास करवाने में सहायक है l प्रत्येक बच्चे का प्रगति चार्ट न केवल बच्चे को उसकी प्रगति के बारे में बताता है, बल्कि उसे अधिगम क्रियाकलापों में लगाये रखता है l

11. बच्चों में व्यक्तिगत विभिन्नताएँ :- बच्चों की रुचियाँ व क्षमताएँ भिन्न-भिन्न होती हैं l सभी बच्चों को हर समय, हर पाठ के लिए एक ही ढंग से प्रेरित नहीं किया जा सकता है l यह शिक्षक की जिम्मेवारी है कि वह बच्चों की रुचियों व क्षमताओं का पता लगाए और उसी के अनुसार उन्हें प्रेरित करें l

12. शिक्षण कौशल :- शिक्षक के शिक्षण-कौशल अभिप्रेरणा को बहुत अधिक प्रभावित करते हैं l कक्षा में विद्यार्थियों को अभिप्रेरित करने के लिए कई प्रकार के शिक्षण-कौशलों की आवश्यकता होती है l जैसे कि – पाठ को प्रस्तावित करने का कौशल, प्रश्न पूछने का कौशल, बच्चों के उत्तरों से निपटने का कौशल, बोर्ड के इस्तेमाल का कौशल, सुदृढ़ीकरण का कौशल, विषय-वस्तु को समझाने का कौशल, पाठ को अंत करने का कौशल, मूल्यांकन का कौशल इत्यादि l

13. शिक्षक की अपनी प्रेरणा और शिक्षण में रूचि :- शिक्षक को स्वयं बच्चों में और वह क्या पढ़ा रहा है (विषय-वस्तु) में रूचि लेनी चाहिए l यदि शिक्षक स्वयं कार्य में रूचि नहीं लेता है तो वह बच्चों को कभी अभिप्रेरित नहीं कर सकता है l

उपरोक्त सभी तकनीकें बच्चों को कक्षाकक्ष में अभिप्रेरित करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है l इसके अतिरिक्त और भी नवाचार तकनीकों को ढूंढा जा सकता है l 


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Q. 2. सृजनात्मकता की अवधारणा को परिभाषित कीजिए l आप सृजनात्मकता को बढ़ावा देने हेतु किस प्रकार शिक्षण अधिगम सामग्री विकसित करेंगे ? सृजनात्मकता को बढ़ावा देने में सूचना एवं संचार प्रोद्योगिकी की भूमिका पर चर्चा कीजिए l 
Define concept of creativity. How will you develop teaching learning material for fostering creativity? Discuss the role of ICT in fostering creativity.

ANS.  सृजनात्मकता नई प्रतिक्रियाओं, नए उत्तर देने, नए संबंध बनाने की क्षमता है l सृजनात्मकता अन्य लोगों से या अपने बराबर वालों से अलग होने की, नवाचारी, असामान्य होने की क्षमता है l सृजनात्मक व्यक्ति में अधिकतर विशेषताएँ होती हैं, जैसे – प्रमुखता, आत्मविश्वास, स्पष्टवादी, तीक्ष्ण बुद्धि, आक्रामक, आत्म-केन्द्रित, प्रेरक, मौखिक रूप से धारा प्रवाह, चिंताओं व शिकायतों को व्यक्त करने से मुक्त, स्वतंत्र और पारंपरिक मजबूरियों और अवरोधों से मुक्त l 

सृजनात्मकता सामान्यतः दो प्रकार की होती है – मौखिक सृजनात्मकता और गैर मौखिक सृजनात्मकता l कविताएँ, कहानियाँ, नॉवल आदि लिखना मौखिक सृजनात्मकता के उदाहरण हैं l पेंटिंग, चित्रकला, मूर्तिकला, कार्टून बनाना, रंगोली बनाना, बागवानी, आदि गैर मौखिक सृजनात्मकता के उदहारण हैं l 
अधिकतर बच्चे जन्म से ही सृजनात्मक होते हैं परन्तु बड़े होते-होते इसे खोने लगते हैं l डेविस के अनुसार पाँच वर्ष की उम्र के 90% बच्चे उच्च सृजनात्नक होते हैं और 25 की उम्र के लोगों में केवल 2% ही सृजनात्मकता होती है l इसका अर्थ ये है कि बढती उम्र सृजनात्मकता को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है l
सृजनात्मकता को बढ़ावा देने के लिए शिक्षण-अधिगम सामग्री का विकास:-
जब शिक्षक सृजनात्मकता को बढ़ावा देने में रूचि लेता है तो उसे बहुत धैर्य, खुला मष्तिष्क रखना होता है और उसे अपना गुस्सा, जलन, हताशा आदि को नियंत्रित करना होता है l कभी-कभी उसे बच्चों के सामने अभिनय भी करना पड़ता है l हमें बच्चों को सोचने के लिए पर्याप्त स्वतंत्रता देनी चाहिए l वे कैसे भी बैठें, दूसरे शब्दों में हमें कक्षा में अनुशासनहीनता बर्दाश्त कर लेनी चाहिए l टोरेंस और मेयर्स ने बच्चों में सृजनात्मकता बढ़ाने हेतु शिक्षकों के लिए कुछ सिद्धांत दिए हैं – 
क) बच्चों के विचारों का सम्मान करें l 
ख) कल्पनाशील और असामान्य विचारों का सम्मान करें l 
ग) शिक्षार्थियों को दर्शाएँ कि उनके विचारों का मूल्य है l 
घ) स्वयं शुरू किये गए अधिगम को प्रोत्साहित करें व उसका मूल्यांकन करें l 
ड) कारणों और परिणामों के साथ मूल्यांकन को जोड़ें l 



ये सिद्धांत शिक्षकों द्वारा अधिगम सामग्री विकसित करते समय लागू होता है l अतः सृजनात्मकता को बढ़ावा देने हेतु जो शिक्षण सामग्री विकसित करेंगे उनमें निम्नलिखित विशेषताएँ होनी चाहिए – 
(a) क्रियाकलापों के कई संभावित उत्तर होने चाहिए l 
(b) क्रियाकलाप खुले अंत वाली होनी चाहिए, यानि उसका एक उत्तर नहीं होना चाहिए l 
(c) क्रियाकलापों में पकड़ होनी चाहिए ताकि बच्चों को सोच में लचीलापन मिल सके l 
(d) क्रियाकलाप व्यक्तिगत क्षमताओं को विकसित करने के लिए हो सकते हैं जैसे प्रवाह, लचीलापन, मौलिकता, जिज्ञासा, दृढ़ता, विस्तार और समस्याओं के प्रति संवेदनशीलता l 
(e) क्रियाकलाप भले ही तुरंत प्रयोग न हो पायें, फिर भी कक्षा में उसका महत्त्व है l 
(f) कई तरह की पहेलियाँ, रहस्यमयी योजनाएँ, और भिन्न सोच के प्रश्न एकत्र करके कक्षा में प्रयोग के लिए रख सकते हैं l 
(g) क्रियाकलापों में कल्पना पर बल होना चाहिए और रुढ़िवादी व्यवहार पर जोर नहीं देना चाहिए l 
(h) क्रियाकलाप सृजनात्मकता पर शोध कर रहे शोधकर्ताओं के मॉडलों पर आधारित हो सकते हैं l 
(i) ये क्रियाकलाप पाठ के विस्तार का भाग हो सकते हैं l 
(j) शिक्षक द्वारा कक्षा में काल्पनिक कहानियाँ अवश्य सुनाई जानी चाहिए ताकि उनमें नेता बनने की क्षमता का विकास हो l 
(k) कोई भी क्रियाकलाप सृजनात्मकता बढ़ाने वाला क्रियाकलाप बन सकता है बशर्ते शिक्षक इसे अलग पहलू से देखें l 
(l) सरल क्रियाएँ सृजनात्मकता बढ़ाने वाली क्रियाएँ बन सकती है यदि उनमें नए आयामों को जोड़ दिया जाए या कुछ भाग निकाल दिया जाए l 
(m) अपनी संस्कृति या कहानियों में से उन उपाख्यानों को एकत्र करेंगे जिनमें कुछ प्रेरणा या सृजनात्मकता का रंग है l 
(n) महाकाव्यों और संस्कृति के महान साहित्य से कहानियों की किताबें एकत्रित व संग्रहित की जा सकती है l

सृजनात्मकता को बढ़ाने में सूचना व संचार प्रोद्योगिकी की भूमिका:-
सृजनात्मकता विकास के लिए कई ICT उपकरण उपलब्ध है जिन्हें शिक्षक प्रयोग कर सकता है l कुछ उपकरण जो कक्षाकक्ष में प्रयोग किया जा सकता है वे हैं – ब्लैक बोर्ड, डिजिटल ब्लैक बोर्ड, चार्ट, पोस्टर, ऑडियो कैसेट प्लेयर, ओवर हेड प्रोजेक्टर, और कंप्यूटर l इनमें से प्रत्येक को विभिन्न क्रियाकलाप के प्रस्तुति में उपयोग किया जा सकता है l जैसे कि – ब्लैक बोर्ड या चार्ट पर चित्र प्रस्तुत किया जा सकता है जिसपर बच्चों को कहानी लिखनी है l एक अधूरी कहानी को ऑडियो कैसेट प्लेयर पर बच्चों को सुनाई जा सकती है जिसे बच्चे सुनकर उसको पूरा कर सके l कंप्यूटर स्क्रीन पर कई अमूर्त चित्रों का प्रदर्शन कर बच्चों से व्याख्या करवाया जा सकता है l प्रोजेक्टर की मदद से ऑडियो विजुअल सामग्री प्रदर्शित किया जा सकता है l कई ऐसे वेबसाइट हैं जहाँ पहेलियाँ उपलब्ध हैं जिन्हें बिना किसी सहायता के बच्चों से हल करवाया जा सकता है l कंप्यूटर पर चित्र द्वारा रहस्यमयी स्थितियाँ और भिन्न सोच के प्रश्न पूछे जा सकते हैं ताकि बच्चे समस्या को समझें और सृजनात्मक हल ढूंढे l कंप्यूटर पर रूपात्मक संश्लेषण पर कार्य हो सकता है जहाँ मापदंडों का विवरण निकालकर, सूचनाओं को जोड़कर एक नया उत्तर बनाया जा सकता है l सूचना एवं संचार प्रोद्योगिकी की इन सारी गतिविधियों के अतिरिक्त भी कई अन्य उपयोग हैं जिनके मदद से बच्चों में कल्पनाशीलता और सृजनात्मकता को बढ़ाया जा सकता है l




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