Deled Course 508 Assignment 2 Question 1 with Answer in Hindi

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Deled Course 508 Assignment 2 Question 1 with Answer in Hindi

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Nios Deled Assignment 508 in Hindi- Assignment 2 Question 1 Answer

Q. 1. अर्थपूर्ण व सार्थक शारीरिक श्रम के परिप्रेक्ष्य कार्य शिक्षा की अवधारणा की व्याख्या कीजिए l
Explain the concept of work education in the light of purposeful and meaningful physical work.
Deled Course 508 Assignment 2 Question 1 with Answer in Hindi
उत्तर - कार्य शिक्षा की अवधारणा :- कार्य शिक्षा को उद्देश्यपूर्ण और सार्थक शारीरिक श्रम माना गया है जो शिक्षण प्रक्रिया के अन्तरंग भाग के रूप में आयोजित करता है l यह अर्थपूर्ण सामग्री के उत्पादन और समुदाय की सेवा के रूप में परिकल्पित होता है जिसमें बच्चे आत्मसंतोष और आनंद का अनुभव साझा करते हैं l कार्य शिक्षा ज्ञान, समझ, व्यावहारिक कौशल, और मूल्यपरक जीवन क्रियाओं को शैक्षिक गतिविधियों में शामिल करने पर जोर देती है l
जिन शैक्षिक व्यवस्थाओं ने श्रम के महत्त्व को स्वीकार नहीं किया है वे ऐसे बच्चे तैयार करते हैं जो खुद को अपने देश की बौद्धिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत से कटा पाते हैं l कार्यविहीन शैक्षिक पाठ्यचर्या बच्चों को दुनियाभर की विवेकहीन सूचनाओं से तो लैस कर सकती है परन्तु वास्तविक अर्थों में उन्हें सृजनशील जिम्मेदार नागरिक नहीं बना सकती l
काम से जुड़ाव बच्चे को उनके सामाजिक प्राकृतिक परिवेश के निकट लाता है, प्राकृतिक संसाधनों की पहचान कराता है और भावी व्यावसायिक जीवन की तैयारी का भी काम करता है l वे बच्चे जो सुविधापरक सामाजिक आर्थिक वर्ग से संबंध रखने के कारण काम की दुनिया से अपरिचित है, वे सहस्त्रों आवश्यक-अनावश्यक सूचनाओं के भंडारगृह व ज्ञाता तो हैं परन्तु उनका ज्ञान, कौशल व सामाजिक समझ तरह-तरह के काम करने वाले बच्चों की तुलना में कमतर हैं l
श्रम को सम्पूर्ण शैक्षिकचर्या में शामिल करने से बच्चों को कई लाभ प्राप्त हो सकते हैं जैसे कि –
सामुदायिक संसाधनों की अर्थपूर्ण जानकारी हो सकती है l 
गुणवत्ता परक जीवन जीने के हुनर सीखने को मिल सकता है l 
स्थिति विशेष को आलोचनात्मक दृष्टिकोण से देखने का कौशल विकसित हो सकता है l 
उपलब्ध स्थानीय अर्थव्यवस्था में ही अपने पैरों पर खड़े होने का मौका मिल सकता है l 
काम के साथ-साथ उच्च शिक्षा पूरी करने का अवसर मिल सकता है l 
मेहनत से किये गए कार्य पर गर्व करने की अनुभूति हासिल कर सकता है l 
और यह भी संभव है कि विद्यालयी दिनचर्या में रचनात्मक बदलाव देखने को मिले l
अर्थपूर्ण और सार्थक शारीरिक श्रम के परिप्रेक्ष्य में कार्य शिक्षा की अवधारणा को निम्नलिखित घटकों में बेहतर रूप से समझा जा सकता है –
कार्य शिक्षा :-
हाथ और मस्तिष्क में समायोजन स्थापित करती है,
शैक्षिक क्रियाओं में अन्तर्निहित समाजोपयोगी शारीरिक श्रम है,
सीखने की प्रक्रियाओं का अनिवार्य व महत्वपूर्ण घटक है,
समुदाय के लिए उपयोगी सेवाओं अथवा उत्पादक कार्य के रूप में परिलक्षित होती है,
बहुस्तरीय शिक्षा प्रणाली में शिक्षा के हर चरण में आवश्यक घटक के रूप में जुड़ी हुई है,
करने के द्वारा सीखने के सिद्धांत पर आधारित है l
कार्य शिक्षा में अन्तर्निहित कार्य :-
समस्या समाधान, समालोचनात्मक सोच, निर्णय लेना आदि कौशलों का विकास करते हैं, 
सभी विषयों से जुड़े शिक्षकों की भागीदारी आमंत्रित करते हैं,
विद्यार्थियों की आवश्यकताओं, रुचियों व क्षमताओं पर आधारित होते हैं, 
शिक्षा के स्तरों के अनुसार विद्यार्थियों के दक्षताओं में वृद्धि करते हैं,
व्यक्तित्व के विकास में सहायता करते हैं,
व्यवसायिक तत्परता तथा उत्पादन संबंधी कुशलता में वृद्धि व विकास करते हैं,
विविध प्रकार के युक्तियों, तकनीकों, उपकरणों व पदार्थों के साथ अंतःक्रिया के अवसर सुलभ कराते हैं,
सामुदायिक सेवा संबंधी स्थितियों में अनुभव लेने के अवसर सुलभ कराते हैं,
कार्य जगत से परिचित करवाते है l
कार्य शिक्षा की सफलता के लिए जरुरी है – 
विचारों का खुलापन 
श्रम के प्रति आदर एवं सकारात्मक दृष्टिकोण 
समुदाय व विद्यालय के बीच सकारात्मक संबंध 
सहयोग की भावना 
कल्पनाशीलता एवं रचनात्मक दृष्टिकोण
गुरु रविन्द्रनाथ टैगोर के शब्दों में :-
“सांस्कृतिक पुनर्जागरण के लिए शिक्षा को शारीरिक श्रम से अलग नहीं किया जा सकता l प्रत्येक विद्यार्थी को अपने विशिष्ट समुदाय के दायरे के बाहर विशाल व्यापक मानव समाज की सेवा के कुछ कार्यक्रमों में भाग लेना चाहिए l कार्य को शिक्षा के माध्यम के रूप में लिया जाना चाहिए क्योंकि अनुभव हमारे मस्तिष्क की खिड़कियाँ हैं l” 

वास्तव में, शिक्षा का वास्तविक एवं आदर्श दायित्व है कि वह विद्यार्थियों को जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करें l इसके लिए जरुरी है कि शैक्षिक पाठ्यक्रमों में जीवन स्थितियों से जुड़े हुनर, दस्तकारी के कार्य व अन्य कार्य कौशलों को महत्वपूर्ण स्थान मिलें l शिक्षा द्वारा ऐसी योग्यताएँ पैदा की जाएँ जो बच्चों को दैनिक जीवन की माँगों और चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के काबिल बनाएँ और सकारात्मक विकास के व्यवहार में सहायक हो l यह तभी संभव है जब विद्यार्थी सूचनाओं के किताबी दायरों से बाहर निकलकर कार्य की दुनियाँ में प्रवेश करेंगे l इसके लिए यह सुनिश्चित करना जरुरी है कि शारीरिक श्रम को शिक्षा से जोड़ा जाए यानि कि कार्य शिक्षा को शैक्षिक व्यवस्था का अभिन्न अंग बनाया जाए l

उपर्युक्त विवरण के मध्यम से कार्य शिक्षा की अवधारणा व अर्थ स्पष्ट परिलक्षित होता है l संक्षेप में कहा जा सकता है कि कार्य शिक्षा एक उद्देश्यपूर्ण अर्थपूर्ण शारीरिक श्रमयुक्त गतिविधि है जो विद्यालयी पाठ्यचर्या के सभी सोपानों में सुनियोजित, सुगठित रूप से समायोजित होती है और उत्पाद अथवा सामाजिक सेवा के रूप में परिलक्षित होती है l

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