DELED ASSIGNMENT 509 ANSWER IN HINDI - ASSIGNMENT-1 QUESTION-1


DELED ASSIGNMENT 509 ANSWER IN HINDI - ASSIGNMENT-1 QUESTION-1 इस पोस्ट में COURSE CODE 509 का असाइनमेंट 1 का पहला प्रश्न उत्तर देखें l

DELED ASSIGNMENT 509 ANSWER IN HINDI - ASSIGNMENT-1 QUESTION-1

अगर आप इससे पहले कोर्स 506 507 और 508 का असाइनमेंट नहीं लिखें हैं तो इस साईट पर आपको सभी असाइनमेंट का उत्तर मिल जाएगा आप पहले उसे देख लें l अब बात करते हैं ASSIGNMENT 509 का l 

ASSIGNMENT 509 ANSWER - ASSIGNMENT-1 QUESTION-1

Q. 1. सामाजिक अध्ययन और सामाजिक विज्ञान की अवधारणा के बीच संबंधों का वर्णन कीजिए, बदलते हुए सामाजिक दृश्य के संबंध में सामाजिक विज्ञान के भारतीय परिप्रेक्ष्य की चर्चा कीजिए l 
Describe the relationship between the concept of Social Studies and Social Sciences. Discuss the Indian perspective of Social Science in the context of changing social scenario.
DELED ASSIGNMENT 509 ANSWER IN HINDI
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उत्तर - अवधारणात्मक रूप से, सामाजिक अध्ययन और सामाजिक विज्ञान एक दूसरे से संबंधित है तथा कई पहलूओं में एक दूसरे से भिन्न हैं l इन दोनों के बीच अवधारणात्मक रूप से संबंधों एवं विभिन्नताओं का विस्तृत वर्णन निम्नलिखित है – 

सामाजिक अध्ययन की अवधारणा :- सामाजिक अध्ययन की अवधारणा हाल ही में उदय हुआ है l विद्यालय पाठ्यचर्या के एक भाग के रूप में विचार करने के लिए सामाजिक अध्ययन का उद्भव और विकास हुआ l विस्तृत पैमाने पर सामाजिक अध्ययन का उपयोग 1916 से अमेरीका में शुरू हुआ l भारत में इसका उपयोग गाँधी जी के ‘मौलिक शिक्षा, 1937’ सूत्रीकरण के बाद ही देखा जा सकता है l

सामाजिक अध्ययन एक एकल व संयुक्त अनुदेशात्मक क्षेत्र है जो अपनी पाठ्य वस्तु को अनेकों सामाजिक विज्ञानों जैसे – इतिहास, भूगोल, राजनीती विज्ञान, अर्थशास्त्र आदि में से निकालता है l सामाजिक अध्ययन सामाजिक विज्ञान के विषयों से असंबंधित तरीके से नहीं जोड़ता है बल्कि जहाँ विद्यार्थी रहता है उस समाज/वातावरण से स्त्री/पुरुषों के संबंधों को, अध्येता के समझने की सहायता के उद्देश्य से, उन्हें अर्थपूर्ण तरीके से जोड़ता है l सामाजिक अध्ययन अधिगम का मुख्य उद्देश्य स्वस्थ सामाजिक जीवन से जुड़ी हुई दक्षताओं को विकसित करना है l सामाजिक अध्ययन, समाज के व्यवहारगत पक्ष से संबंधित है l
जेम्स हाई के शब्दों में – “सामान्य अर्थों में, सामाजिक अध्ययन, सामाजिक विज्ञान की विद्वतापूर्ण खोज का विद्यालयी दर्पण है l ऐसे आंकड़े, जिनको की समाज वैज्ञानिक एकत्रित कर सकते हैं, सभी ग्रेडों में बच्चों के लिए अभिव्यक्ति के सटीक स्तर को समाकलित व सरलीकृत करते हैं l”
जॉन वी. मिशेल के शब्दों में – “सामाजिक अध्ययन मनुष्य और उसके सामाजिक तथा भौतिक वातावरण के संबंधों से संबंधित है, ये मानवीय संबंधों से संबंधित है l सामाजिक अध्ययन का केन्द्रीय कार्य शिक्षा के केन्द्रीय उद्देश्य के जैसा ही है – प्रजातान्त्रिक नागरिकता का विकास l
निम्नलिखित बिन्दुओं को सामाजिक अध्ययन की प्रकृति के विशेषता के रूप में जाना जा सकता है –
1. सामाजिक-सांस्कृतिक वातावरण के सन्दर्भ में सामाजिक अध्ययन मानवीय अध्ययन से संबंधित है l 
2. विद्यार्थियों के बीच स्वस्थ सामाजिक/प्रजातान्त्रिक जीवन को बढ़ावा देने के लिए विद्यालय स्तर पर पढ़ाये जाने के लिए, सामाजिक अध्ययन को अनुदेशात्मक संबंधी क्षेत्र के रूप में सामाजिक विज्ञान में विकसित किया गया है l 
3. सामाजिक अध्ययन, वर्तमान, भूतकाल तथा भविष्य के बीच संबंध स्थापित करता है l 
4. सामाजिक अध्ययन अधिकांशतः मानव जीवन के समकालीन संबंधों तथा इसकी समस्याओं पर अधिक बल देता है l अपेक्षाकृत मनुष्य के पिछले इतिहास के l 
5. सामाजिक अध्ययन का उद्देश्य विद्यार्थी को सामाजिक-सांस्कृतिक वातावरण, जिसमें परिवार, समुदाय, राज्य, राष्ट्र एवं विस्तृत रूप में सम्पूर्ण मानवता के साथ सामंजस्य करने के योग्य बनाता है l 
6. सामाजिक अध्ययन, समाज के व्यावहारिक पक्ष संबंधित है या वास्तविक पाठ्यक्रम है l 
7. सामाजिक अध्ययन इस समय वृद्धि और विकासशील अवस्था में है l यह अपने क्षेत्र को और बड़ा एवं विस्तृत करने की कोशिश कर रहा है l 
8. सामाजिक अध्ययन को स्वस्थ सामाजिक जीवन से संबंधित आवश्यक दक्षताओं को विकसित करने के लिए, विद्यालय स्तर पर, मुख्य विषय के रूप में जाना जाता है l

सामाजिक विज्ञान की अवधारणा :- सामाजिक विज्ञान ज्ञान का वह ढाँचा है जो विस्तृत सामाजिक-सांस्कृतिक व्यवस्था के स्पेक्ट्रम में मानवीय संबंधों से संबंधित है l सामाजिक विज्ञान उच्च शिक्षा पाठ्यक्रम के एक महत्वपूर्ण घटक का निर्माण करता है l सामाजिक विज्ञान के विभिन्न विषय जैसे – इतिहास, राजनीती विज्ञान, दर्शनशास्त्र, अर्थशास्त्र, मानव विज्ञान आदि की विश्वविद्यालय शिक्षा / उच्च विद्यालयी शिक्षा में स्वतंत्र भूमिका है चार्ल्स वीयर्ड एवं जेम्स हाई की निम्न परिभाषाओं को सामाजिक विज्ञान की अवधारणा की समान स्पष्टता के लिए जोड़ा जा सकता है l
चार्ल्स वीयर्ड – “सामाजिक विज्ञान, तीलियाँ, पत्थरों, तारों और भौतिक वस्तुओं, से अलग ज्ञान और विचार की वह शाखा है जो मानवीय संबंधों से सरोकार रखता है l”

जेम्स हाई – “सामाजिक विज्ञान अधिगम व अध्ययन का वह भाग है जो भौतिक एवं अभौतिक उद्दीपनों की समकालिक एवं आपसी क्रिया की पहचान करता है, जो सामाजिक प्रतिक्रिया का निर्माण करता है l”

निम्नलिखित बिन्दुओं के द्वारा सामाजिक विज्ञान की प्रकृति की विशेषता को बताया जा सकता है –
1. मानवीय क्रियाकलापों पर प्रत्यक्ष प्रभाव - सामाजिक विज्ञान ज्ञान का वो पहलू है जिसका विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक क्षेत्रों में मानवीय क्रियाकलापों पर प्रत्यक्ष प्रभाव होता है l 
2. मानव समाज का उन्नत अध्ययन - सामाजिक विज्ञान मानवीय विज्ञान का उन्नत स्तर का अध्ययन है और सामान्यतया इसको ऊँचे शिक्षा स्तरों पर पढ़ाया जाता है l 
3. मानवीय संबंधों के बारे में सत्यता की खोज करता है - सामाजिक विज्ञान मानवीय संबंधों के बारे में सत्यता की खोज करता है अंततः सामाजिक उपयोग एवं ज्ञान के उन्नयन में योगदान देता है l
भारतीय परिप्रेक्ष्य में सामाजिक विज्ञान: बदलते हुए सामाजिक दृश्य के संबंध में –
विभिन्न कालों की शिक्षा पद्धति में सामाजिक विज्ञान एक अहम हिस्सा बन चुका है, नैतिकता, आध्यात्मिकता, सामाजिक मूल्यों और वृतियों आदि जीवन के भारतीय जीवन दर्शन का पथ प्रदर्शन कर रहे हैं और सदियों से जी रहे हैं l वेद, उपनिषद, स्मृति पुराण, रामायण, महाभारत, पूर्व एतिहासिक भारतीय ग्रन्थ है जिसमें सामाजिक मूल्यों एवं स्वस्थ जीवन जीने के सिद्धांत समाहित है l कौटिल्य का अर्थशास्त्र, विष्णु शर्मा का पंचतंत्र आदि प्राचीन भारत की कुछ ऐसी रचनाएँ हैं जो सामाजिक विज्ञान की नीतियों और सिद्धांतों से संबंध रखती है l मध्यकालीन और पूर्व मध्यकालीन साहित्यिक परम्पराओं जैसे बुद्ध की रचनाएँ, जैन की रचनाएँ, इस्लामिक रचनाएँ, भक्ति रचनाएँ आदि को सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों और धरोहरों की रचनाएँ समझा जाता है l इन सभी संदर्भो को देखते हुए हम कह सकते हैं कि सामाजिक ज्ञान प्राचीन तथा मध्यकाल से भारतीय शिक्षा और संस्कृति, पद्धति दोनों का एक अहम हिस्सा बन गया था l परन्तु भारतीय उच्च शिक्षा और विश्वविद्यालयी शिक्षा पद्धति में सामाजिक विज्ञान औपचारिक रूप से 18वीं 19वीं सदी में हिस्सा बन चुका है तथा गांधीजी के मूलभूत शिक्षा के सिद्धांत के बाद से भारतीय विद्यालय शिक्षा पद्धति का भी औपचारिक हिस्सा बन चुका है l

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