507 KA ASSIGNMENT ANSWER-ASSIGNMENT-3 QUESTION-1

Chandan 6:12 pm
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507 KA ASSIGNMENT ANSWER-ASSIGNMENT-3 QUESTION-1 - What type of resources is needed to manage a school? Give any thee practical suggestions for human resources management and write a plan for implementation of these suggestions.

प्रश्न - 1. किसी विद्यालय के प्रबंधन हेतु किस प्रकार के संसाधनों की आवश्यकता होती है ? अपने विद्यालय में मानव संसाधन प्रबंधन हेतु किन्हीं तीन व्यावहारिक सुझावों को लिखिए तथा उन सुझावों को लागू करने की योजना लिखिए l

507 KA ASSIGNMENT ANSWER-ASSIGNMENT-3 QUESTION-1
उत्तर- विद्यालय के सफलता पूर्वक कार्य करने हेतु प्रबंधन बहुत महत्वपूर्ण हैं l प्रबंधन वह प्रक्रिया है जिसमें सहयोगी समूह विद्यालय के लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु क्रियाओं को निर्देशित करता है l हरोल्ड कूंज ने कहा है कि “औपचारिक रूप से संगठित समूहों को व्यक्तियों द्वारा तथा व्यक्तियों के साथ मिलकर कार्य पूर्ण करने की कला प्रबंधन हैं l” इसी सन्दर्भ में हेनरी फयोल ने भी प्रबंधन का बहुत ही अच्छा अर्थ बतलाया है l हेनरी फयोल के शब्दों में – “प्रबंधन करने का अर्थ है – भविष्यवाणी करना, और नियोजन करना, संगठित करना, कमांड करना, समन्वयन तथा नियंत्रण करना है l”

किसी भी संस्था के प्रबंधन में आउटपुट प्राप्त करने के लिए विभिन्न प्रकार के संसाधनों यानि इनपुट का प्रयोग किया जाता है l बात यदि विद्यालय प्रबंधन की किया जाये तो इसके लिए भी कई प्रकार के संसाधनों की आवश्यकता होती है l किसी विद्यालय प्रबंधन में शामिल है – इंफ्रास्ट्रक्चर, सुविधाएँ, निधियां, शिक्षक, विद्यार्थी, शिक्षण अधिगम विधियाँ तथा सामग्री l विद्यार्थियों की पाठ्य तथा पाठ्य-सहगामी क्रियाओं में उपलब्धि, शिक्षकों का व्यावसायिक विकास आदि, आउटपुट हैं l शिक्षण-अधिगम क्रियाएँ, अनुशासन, वातावरण तथा अन्य शैक्षिक कार्य, विद्यालय-प्रक्रियाओं के अंतर्गत आते हैं l इस प्रकार हम कह सकते हैं कि विद्यालय प्रबंधन में मुख्य रूप से तीन प्रकार के संसाधन शामिल हैं – मानव संसाधन, सामग्री संसाधन तथा वितीय संसाधन l
1. मानव संसाधन :- एक विद्यालय के लिए मानव संसाधन अनिवार्य रूप से आवश्यक है l एक विद्यालय के मानव संसाधन में मुख्य रूप से शामिल हैं – शिक्षक, विद्यार्थी और समुदाय l विद्यालय में सबकी अपनी-अपनी भूमिका है l विद्यालय प्रबंधन में इन तीनों की भूमिका स्पस्ट है l शिक्षक विद्यार्थियों को पढ़ाते हैं, आवश्यक जीवन कौशल का ज्ञान देते हैं और विद्यार्थी शिक्षकों से प्राप्त ज्ञान और कौशल से दुनियां से परिचित होते हैं तथा बेहतर जीवन जीते हैं l एक शिक्षक विभिन्न शिक्षण अधिगम प्रक्रियाओं का उपयोग कर विद्यार्थियों को प्रेरित करते हैं l उनकी समस्याओं का समाधान करते हैं l और मददगार के रूप में ज्ञान प्राप्त करने में उनकी मदद भी करते हैं l
विद्यार्थी सक्रिय रूप से शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में शामिल होकर आवश्यक कौशल सीखते हैं l अनुशासन में रहना सीखते हैं , नेतृत्व कौशल प्राप्त करते हैं , सामाजिक-सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनते हैं l वास्तव में एक विद्यालय में मानव संसाधन का यह प्रतिफल है l

समुदाय भी विद्यालय प्रबंधन में आवश्यक रूप से शामिल होते हैं l विद्यालय और समुदाय में घनिष्ठ संबंध होता है l विद्यालय को समुदाय से काफी लाभ प्राप्त होता है बदले में समुदाय भी लाभान्वित होता है l कुल मिलकर कहा जाए तो शिक्षक, विद्यार्थी और समुदाय मिलकर एक विद्यालय के मानव संसाधन की पूर्ति करता है l

2. सामग्री संसाधन :- एक विद्यालय प्रबंधन में सामग्री संसाधन के अंतर्गत कई सूक्ष्म चीजों से लेकर वृहद चीजें भी शामिल हैं l जिस प्रकार एक किसान को फसल उगाने के लिए खेत, बीज, पानी, खेत की मशीनरी, बैल या ट्रेक्टर, खाद, कीटनाशक आदि की आवश्यकता है जिसके बिना एक किसान कुछ भी नहीं कर सकता हैं l ठीक उसी प्रकार, विद्यालय के लिए जमीन, भवन, बेंच-डेस्क, ब्लैक बोर्ड, चाक, डस्टर, रजिस्टर, खेल के मैदान, शिक्षण सामग्री (TLM) इत्यादि बहुत ही आवश्यक है l इसके बिना एक विद्यालय विद्यालय नहीं रह जायेगा l विद्यालय से आउटपुट प्राप्त करने के लिए सामग्री संसाधन आवश्यक है l विद्यालय में मानव संसाधन एक सक्रिय श्रोत हैं जो इन सभी सामग्री तथा सुविधाओं का सृजन बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए करता है l
3. आर्थिक संसाधन :- विद्यालय सुचारू रूप से चले इसके लिए धन की आवश्यकता होती है l शिक्षकों के वेतन के लिए बहुत अधिक धन की आवश्यकता होती है l विद्यालय के अन्य कार्यों जैसे कि TLM खरीदना, कार्यक्रमों का आयोजन करना, शिक्षक-अभिभावक बैठक में चाय-नाश्ता का प्रबंध करना, विद्यालय में टूट फुट की मरम्मती करना इत्यादि कई ऐसे कार्य हैं जो धन के बिना नहीं हो सकता l संस्थानों में पर्याप्त भौतिक सुविधाओं का विकास, पर्याप्त शिक्षकों की उपलब्धता के लिए धन आवश्यक है l अब सवाल ये है कि विद्यालयों के लिए आर्थिक संसाधन की पूर्ति कहाँ से होती है ?

एक विद्यालय का प्रमुख आर्थिक श्रोत सरकार ही है l इसके अंतर्गत तीन प्रकार की सरकारें आती है – केंद्र सरकार, राज्य सरकार और स्थानीय निकाय l भारत में संघीय प्रणाली है, जिसका अर्थ है- भारतीय संविधान के अनुसार केंद्र में एक सरकार है और राज्य में भी एक सरकार है l भारत में संवैधानिक प्रावधान के अधीन शिक्षा समवर्ती सूचि में रखा गया है l इसका अर्थ यह है कि केंद्र तथा राज्य दोनों सरकारें शैक्षिक सेवाओं तथा संस्थाओं के लिए नियम बनाते हैं और नियंत्रण रखते हैं l सरकारी संस्थाओं को धन प्रदान करने तथा नियंत्रण रखने का काम सरकार करती है l सरकार से सहायता प्राप्त शैक्षिक संस्थाओं को ग्रांट इन एड के नियमों के तहत धन की सहायता प्रदान की जाती है l
वर्तमान समय में बहुत से स्थानीय निकाय, संगठन, ट्रस्ट, समितियाँ, व्यापार मंडल और कुछ विदेशी संस्थाएं देश में प्राथमिक विद्यालय स्थापित करने में सरकार की सहायता कर रही है l विद्यालयों को इन संस्थाओं द्वारा विद्यालय भवन, सुविधाएँ, शिक्षकों का वेतन, पुस्तकें आदि पर व्यय हेतु धन की सहायता मिलती है l
विद्यालय में मानव संसाधन प्रबंधन हेतु सुझाव तथा योजना :-
1. मानव शक्ति आवश्यकता :- शैक्षिक योजनाएँ देश में मानव शक्ति की आवश्यकता या आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखकर बनायी जानी चाहिए l सामग्री तथा सेवाओं के उत्पादन हेतु श्रमिकों की आवश्यकता होती है l इनके लिए सामान्य शिक्षा या विशेष कौशलों की आवश्यकता हो सकती है l जब उत्पादन प्रक्रिया सरल होती है तो शिक्षा व कौशलों की आवश्यकता भी सामान्य या सरल हो सकती है l लेकिन जब उत्पादन प्रक्रिया जटिल हो तो सामान्य शिक्षा के उच्च स्तर तथा कौशलों की आवश्यकता होगी l जिसमें विशेष प्रशिक्षण की जरुरत होगी l उदहारण के लिए कंप्यूटर उद्योग में हार्डवेयर भागों का उत्पादन, मोबाइल फ़ोन व दवाइयों के उत्पादन हेतु श्रमिको को न केवल उच्च स्तर की सामान्य शिक्षा परन्तु विशिष्ट प्रकार के कौशलों की आवश्यकता होती है जो विशेष प्रशिक्षण द्वारा प्राप्त किये जा सकते हैं l इसलिए विद्यालय को विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों में उत्पादन प्रक्रिया हेतु अपने विशेष ज्ञान एवं पारंगतता के उपयोग द्वारा मानव शक्ति की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए कार्य करना होगा l मानव शक्ति की भावी आवश्यकता की पूर्ति हेतु शिक्षार्थियों को विशेष शिक्षा एवं प्रशिक्षण देना चाहिए ताकि वे भविष्य की चुनौतियों का सामना कर सकें l

2. विद्यालय में समुदाय की सहभागिता :- अच्छी शिक्षा एवं प्रशिक्षण को सुदृढ़ बनाने हेतु विद्यालय एवं समुदाय की सहभागिता बहुत महत्वपूर्ण हैं l मानव संसाधन प्रबन्धन में ये तीन विकट समस्या है – 
(a) बालिकाएं विद्यालय नहीं जा रही है क्योंकि अभिभावक नहीं चाहते l 
(b) बच्चों में ड्राप आउट रेट बहुत ऊँचा है l 
(c) अभिभावक शिक्षक संघ या विद्यालय में सक्रिय रूप से विकास योजनाओं में शामिल नहीं है l 
उपरोक्त सभी प्रकार के समाधान की आवश्यकता है l विद्यालय समुदाय सहभागिता बहुत आवश्यकता है l इसके लिए समुदाय को प्रेरित किया जाना चाहिए l यदि वे विद्यालय में रूचि लेने लगेंगे तो स्वतः सभी समस्याओं का समाधान हो जायेगा l
RTE ACT 2009 के अनुभाग 21 के अंतर्गत विद्यालय प्रबंधन कमिटी बनाने का प्रावधान दिया गया है l इसमें विद्यालय समुदाय सहभागिता और विद्यालय विकास योजना के निर्माण एवं संस्तुति हेतु निर्णय लेने की प्रक्रिया में समुदाय को संलग्न करने हेतु क़ानूनी प्रावधान किया गया है l इन प्रावधानों की जानकारी समुदाय को दिया जाना चाहिए ताकि वे इससे लाभान्वित हो सके l
3. समन्वयन :- एक संस्था में बहुत से कार्यकर्त्ता होते हैं l इनमें से प्रत्येक एक विशेष कार्य निष्पादित करता है l इसलिए यह आवश्यक है कि विभिन्न व्यक्तियों तथा कार्यों के बीच ताल-मेल बनाया जाय l विभिन्न वरिष्ठ कार्यों तथा समूह के व्यक्तियों के प्रयासों के बीच ताल-मेल बनाना ताकि संस्था के निर्धारित उद्देश्यों की पूर्ति हो सके, समन्वयन कहलाता है l यह सामूहिक प्रयासों को सामान्य लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु क्रमानुसार व्यवस्थित करना है l जिससे क्रिया-कलापों में एकरूपता आ सके l विद्यालय में मानव समूहों के बीच समन्वय प्रबंधन की मूल जिम्मेदारी होनी चाहिये ताकि सबमें एकता बनी रहे l

उपरोक्त तीनों सुझाव बहुत ही व्यावहारिक हैं जो विद्यालय में मानव संसाधन के प्रबंधन में सहयोगी है l 

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