506 Deled Assignment in Hindi (PDF NIOS) - सत्रीय कार्य - lll

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COURSE 506
ASSIGNMENT - lll (सत्रीय कार्य - lll )

506 deled assignment in hindi सत्रीय कार्य - lll Question no. 1(with pdf)

Q. 1. एक विद्यालय का अवलोकन कीजिए तथा बच्चों के उन प्रमुख समूहों, जिनका शैक्षिक तंत्र से बहिष्कार होने का खतरा है, पर विविध कारकों के सन्दर्भ में एक विस्तृत प्रदिवेदन तैयार कीजिए l इन समूहों के समावेश हेतु सुझाव दीजिये l 
Observe a school and prepare a detail report on various factors for exclusion on prominent groups of children who are at risk for exclusion from education system. Write suggestive measures for inclusion of these groups. 

ANS.  हमारे देश की शिक्षा प्रणाली में बच्चों के कई ऐसे वर्ग समूह हैं जो शैक्षिक क्षेत्र में पिछड़ेपन का शिकार हैं या शिक्षा प्रणाली में उपेक्षित होने के कारण शिक्षा छोड़ने के जोखिम मं  हैं l ऐसे ही बच्चों के लिए या बच्चों के वर्ग समूहों के लिए समावेशी शिक्षा का सिद्धांत RTE ACT 2009 में लागू किया गया है l समावेशी शिक्षा उन सब बच्चों को शिक्षा देने का उपागम हैं जो शिक्षा प्रणाली में उपेक्षित होने के कारण शिक्षा छोड़ने के जोखिम में हैं l यह उम्मीद करता है कि सभी शिक्षार्थी सामान्य शैक्षिक प्रावधानों के उपयोग से इक्कट्ठे सीखते हैं l यह अवसर की समानता के सामजिक मॉडल पर आधारित हैं l यह अभ्यास विभिन्नता का आदर और विविधता को स्वीकारने के सिद्धांत पर आधारित है जो प्रकृति और मानवता का हिस्सा है l
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समावेशी शिक्षा के इन्हीं सिद्धांतों के विपरीत और शैक्षिक क्षेत्र से बहिष्कार होने के जोखिम से भरा बच्चों के समूहों का पता लगाने के लिए मैंने अपने क्षेत्र के एक प्राथमिक विद्यालय का दौरा कर अवलोकन किया l अवलोकन के पश्चात् बच्चों का उन प्रमुख समूहों, जिनका शैक्षिक तंत्र से बहिष्कार होने का खतरा है, के उपर विस्तृत प्रतिवेदन तैयार किया l 

प्रतिवेदन:- मैंने अपने क्षेत्र का एक प्राथमिक विद्यालय जिसका नाम – प्राथमिक विद्यालय वीर बहादूर टोला, सिकरी है, का दौरा कर कई घंटो तक अवलोकन किया l इस दौरान मैंने बच्चों के उन समूहों को नोट किया जो स्कूल से बाहर होने के जोखिम में हैं, जिसका विस्तृत विवरण निन्मलिखित हैं – 
1. विकलांग बच्चे :- उक्त विद्यालय में मैंने देखा कि तीन बच्चे विकलांगता की श्रेणी में हैं l विकलांगता की वजह से बच्चे शिक्षण कौशल सीखने में समस्या महसूस करते हैं l हालाँकि विकलांगता के कई प्रकार हैं जैसे कि – शारीरिक विकलांगता जिसमें अस्थिजन्य विकलांगता, दृष्टि बाधित, मूक बधिर शामिल हैं तथा मानसिक विकलांगता जैसे कि मंद बुद्धि, अधिगम संबंधी विकलांगता, सामाजिक, भावनात्मक और व्यवहारगत विकलांगता वाले बच्चे इत्यादि l उक्त विद्यालय में एक बच्चा अस्थिजन्य विकलांगता के शिकार हैं तो दो बच्चे मंद बुद्धि की श्रेणी में हैं l विकलांगता के इन वजहों से उक्त बच्चों का स्कूल जाना मुश्किल है या सीखना मुश्किल हैं l परिणामस्वरूप ये बच्चे एजुकेशन सिस्टम से बाहर होने के कगार पर हैं l
2. बालिकाएँ :- उक्त विद्यालय में लड़कियों की उपस्थिति का प्रतिशत बहुत ही कम देखने को मिला l जो भी लडकियाँ उपस्थित थीं मैंने उनसे जानना चाहा कि आखिर क्या वजह है कि लड़कों की तुलना में लडकियाँ कम उपस्थित हैं? जवाब जो मिला वह बहुत आश्चर्यजनक नहीं था l हम सभी जानते हैं कि हमारे समाज में स्त्रियों की हालत बहुत सही नहीं हैं l शारीरिक, सामाजिक, सांस्कृतिक कारणों से बालिकाएँ हानि में रहती है l विशेषकर गांवों में और संयुक्त परिवारों में लड़कियों के साथ अलग ही व्यवहार होता है l उनकी भूमिकाएँ परिवारों द्वरा निर्धारित की जाति हैं और उनकी आवश्यकताओं को अनदेखा कर दिया जाता है l जो प्रोत्साहन उन्हें बचपन में शिक्षा पाने के लिए आवश्यक होता है, वह कई परिवारों में बिल्कुल नहीं मिलता l इसलिए स्कूल छोड़ने में उनका सबसे अधिक खतरा है l
3. वंचित वातावरण से आए हुए बच्चे :- यह एक माना हुआ तथ्य है कि रहने के वातावरण में अभाव का संकल्पना-निर्माण पर सीधा प्रभाव पड़ता है l यह स्वाभाविक है कि गरीब परिवारों से, दिहाड़ी पर काम करने वालों के, झुग्गी-झोपडी वाले व बेघर परिवारों के बच्चे अपने आर्थिक, सामाजिक व मनोवैज्ञानिक वातावरण में समस्याओं का सामना करते हैं l कुछ ऐसे ही वंचित वातावरण से आए हुए बच्चे भी इस स्कूल में हैं जो कभी भी स्कूल छोड़ सकते हैं l
4. बच्चे जो प्रतिभाशाली और सृजनात्मक हैं :- बच्चों की कभी-कभी कुछ क्षेत्रों जैसे खेल, संगीत, नृत्य व कला में विशेष प्रतिभा होती हैं l ऐसे बच्चे कक्षा में बोर हो जाते हैं क्योंकि हमारी शिक्षा व्यवस्था इन प्रतिभाओं को निखारने के लिए कोई सहायता नहीं करती l इसके उलट, कई बार ऐसे बच्चों को भिन्न सोच के कारण कक्षा में समस्या पैदा करने वाले बच्चे का लेवल लगा दिया जाता है l इस तरह के प्रतिभाशाली और सृजनात्मक बच्चों को स्कूल में परम्परागत क्रियाकलापों से हानि पहुँचती है l ऐसे बच्चों के लिए कक्षा बोरिंग हो जाता है और वे स्कूल छोड़ने का मन बना लेते हैं l कुछ ऐसे भी बच्चे इस स्कूल में हैं जो परंपरागत स्कूली वातावरण से असहज महसूस कर रहे हैं l इन बच्चों का स्कूल से बाहर होने का दर बना हुआ है l


5. कम उपलब्धि वाले बच्चे :- इस विद्यालय में कुछ बच्चे ऐसे भी हैं जो कम उपलब्धि स्तर के हैं l वो अपनी क्षमता का पूरा इस्तेमाल नहीं कर पा रहें हैं l कठोर व नीरस विद्यालय क्रियाकलाप इसके मुख्य कारण हो सकते हैं l कुछ ध्यान भंग करने वाले कारक भी हैं जैसे कि टी.वी., कंप्यूटर l परिवार का, स्कूल, का, माता-पिता का बच्चों से उच्च अपेक्षाएँ और कुछ कर दिखाने का दवाब के चलते ये बच्चे विद्यालय छोड़ने पर मजबूर हो सकते हैं l

6. अल्पसंख्यक व वंचित समुदाय के बच्चे :- कुछ समुदाय अपने अनोखे शारीरिक, भाषा संबंधी, सांस्कृतिक गुणों के कारण तथा निम्न स्तर के जीविका के कारण समाज में सामूहिक तौर पर भेदभाव के शिकार रहे हैं l कुछ ऐसे भी बच्चे इस विद्यालय में हैं जिसे हम वंचित समुदाय के रूप में जानते हैं या अल्पसंख्यक हैं l ऐसे समूह का भाग होने के कारण उन्हें समाज में पूर्ण प्रतिभागिता का अवसर नहीं मिलता l यह हानि और भी बढ़ जाती है यदि दूसरे जोखिम के कारक जैसे गरीबी, विकलांगता आदि भी साथ हो तो l स्कूल में ऐसे बच्चे हाई रिस्क पर हैं, वे कभी भी विद्यालय त्याग कर सकते हैं l

7. भौगोलिक बाधाओं वाले बच्चे :- कभी-कभी भौगोलिक स्थिति भी बच्चों को उपयुक्त वातावरण में शिक्षा प्राप्त करने में बाधा डालती है l पहाड़ी क्षेत्र, दूर-दराज के क्षेत्र, क्षेत्र जहाँ पर उचित परिवहन व्यवस्था नहीं है आदि बच्चों को स्कूल तक आने से रोकती है l और अगर बात प्राथमिक विद्यालय वीर बहादूर टोला, सिकरी की करे तो यह विद्यालय ऐसे भौगोलिक क्षेत्र में स्थित है जहाँ साल के कई महीने बाढ़ की स्थिति रहती है l गहरे क्षेत्र होने के कारण बच्चों को पानी में तैरकर विद्यालय तक पहुँचाना अपने आप में बहुत बड़ा जोखिम है l ऐसी स्थिति में बच्चे शैक्षिक तंत्र से बाहर हो जाए तो इसमें कोई बड़ी बात नहीं हैं l
उपरोक्त विद्यालय के अवलोकन के उपरांत ऊपर वर्णित सभी मुद्दे बहुत ही गंभीर हैं जिसकी वजह से बच्चों के इन समूहों पर शैक्षिक तंत्र से बाहर होने का बहुत अधिक खतरा है l इस खतरा को कम करने के लिए बच्चों के इन समूहों की समावेशन की आवश्यकता है l

506 Deled Assignment in Hindi (PDF NIOS)
उक्त समूहों के समावेशन हेतु सुझाव :-
समावेशन से तात्पर्य है विद्यालयों एवं समुदायों का पुनर्गठन जिससे सभी बच्चे बिना किसी भेदभाव के एक समान वातावरण में सीख पाएँ l इस उद्धेश्य की पूर्ति हेतु निम्नलिखित सुझाव दिए जा सकते हैं – 

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1. एकीकरण :- बच्चों को एकीकृत रूप से शिक्षा दी जाये l यहाँ एकीकरण शब्द का इस्तेमाल विकलांग बच्चों की सामान्य बच्चों के साथ शैक्षिक कार्यक्रमों में प्रतिभागिता करने के लिए किया गया है l एकीकृत करना विकलांग बच्चों को मुख्यधारा में स्थान देने की प्रक्रिया है l एकीकृत करने में विकलांग बच्चे को नियमित स्कूल में ‘फिट’ करने पर जोर है l उन्हें नियमित व्यवस्था में एक साथ बैठने के लिए तैयार किया जाये l उदहारण के लिए – कम सुनने वाले बच्चे को उपयुक्त परिवर्धन यंत्र दिया जाए l अस्थिजन्य विकलांग बच्चे को चलने-फिरने में सहायक उपकरण दिया जाए l दृष्टि दोष वाले बच्चे को विशेष केंद्र में ब्रेल सीखने के लिए भेजा जाए l
   
2. अधिगम सामग्री :- शिक्षण प्रक्रिया में अगर विविध अधिगम सामग्री का प्रयोग किया जाए तो कोई भी बच्चा अधिगम प्रक्रिया में भाग लेगा l चित्र, चार्ट, मॉडल, आसपास के पर्यावरणीय सामग्री, ICT का प्रयोग इत्यादि कई ऐसे साधन हैं जो बच्चों में रूचि जाग्रत कर सकता है और उन्हें बोर होने से बचा सकता है l
3. सृजनात्मकता को बढ़ावा :- हमें परंपरागत शिक्षण तकनीक को पकड़ कर नहीं बैठे रहना चाहिए l बच्चों की आवश्यकता और उनकी सृजनात्मकता को ध्यान में रखते हुए उन्हें विकसित करने के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराये जाने चाहिए l

4. बालिका शिक्षा को बढ़ावा :- बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए क्रन्तिकारी कदम उठाया जाए l लड़कियों के अचीवमेंट को चाहे वह दुनिया के किसी भी कोने में हुआ हो, समाज में अधिक से अधिक प्रचारित किया जाए l समाज के हरेक व्यक्ति को बालिका शिक्षा के प्रति लगातार प्रेरित किया जाए l इतना ही नहीं सरकारी स्तर पर लड़कियों की शिक्षा के लिए विशेष प्रोत्साहन कार्यक्रम चलाया जाए l जैसे कि बिहार सरकार द्वारा साईकिल वितरण कार्यक्रम बहुत ही सराहनीय है l
5. अल्पसंख्यक और वंचित समुदायों को मुख्य धारा में लाना :- अल्पसंख्यक और वंचित समुदायों के बच्चों के शैक्षिक उत्थान के लिए संविधान में भी कई प्रावधान किये गए हैं l उन प्रावधानों को लागू करने और निम्न तबके को फायदा पहुँचाने के लिए सरकार को ईमानदार प्रयास करना होगा l बेरोजगारी को दूर करने के लिए रोजगार का सृजन, आरक्षण, आर्थिक सहयोग, बच्चों के शिक्षा की पूर्ण जिम्मेदारी सरकार को वहन करना चाहिए l
6. आधारभूत संरचना और भौतिक वातावरण :- विद्यालय ऐसे स्थान पर अवस्थित हो जहाँ तक बच्चे आसानी से पहुँच सकें l पर्याप्त कक्षाकक्ष, फर्नीचर की व्यवस्था, पक्के और आकर्षक भवन, रंग-बिरंगे दीवारें, खेल के मैदान, हरा-भरा कैम्पस बच्चे को आकर्षित करता है l इसलिए सरकार को बेहतर आधारभूत संरचना के साथ समुदाय के बीच विद्यालय को बनाना चाहिए ताकि वंचित समुदाय भी शिक्षा के लिए प्रेरित हो सके l
7. प्रशिक्षित शिक्षक :- विद्यालयों में पर्याप्त संख्यां में प्रशिक्षित शिक्षक की उपलब्धता सुनिश्चित किया जाना चाहिए l पर्याप्त संसाधनों के साथ विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए पेशेवरों की भी आवश्यकता है l क्लिनिकल मनोवैज्ञानिक, समाजसेवक, ऑडियोलॉजिस्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, ऑक्यूपेशनल थेरापिस्ट आदि कुछ बच्चों की शिक्षण प्रक्रिया में मदद करने के लिए जरुरी होते हैं l
उपरोक्त सभी सुझाव समावेशी शिक्षा के लक्ष्य को पूरा करने में मदद करेगा तथा विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के समूहों का शैक्षिक तंत्र से बाहर होने वाले जोखिम को कम करेगा l

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