NIOS D.EL.ED. 1000 WORDS ASSIGNMENT ANSWER- 501 ASSIGNMENT- lll / सत्रीय कार्य - lll

Chandan 9:20 pm

Q. विद्यालय से बाहर के बच्चों....

NIOS D.EL.ED. 1000 WORDS ASSIGNMENT ANSWER- 501 ASSIGNMENT- lll / सत्रीय कार्य - lll 


ANS. विद्यालय से बाहर के बच्चों का अर्थ यह है कि वे बच्चे जो विभिन्न कारणों जैसे कि – गरीबी , बेरोजगारी , अज्ञानता, पढाई में रूचि की कमी इत्यादि कई कारणों से बीच में ही प्रारंभिक शिक्षा (1 से 8 कक्षा) पूरी किये बिना विद्यालय छोड़ देते हैं l अर्थात बर्हिवेशन तथा ड्राप आउट के शिकार हो जाते हैं l

प्रारंभिक स्तर पर विद्यालय से बाहर के बच्चों की जाँच के लिए मैंने अपने आस-पास के 10 विद्यालयों का दौरा किया तथा उन बच्चों की सूची बनाई जो विद्यालय से बाहर हो चुके थे जैसा कि नीचे चार्ट में दर्शाया गया है l 
क्रम सं
      विद्यालय का नाम
   ड्राप आउट लिस्ट , वर्गवार


1
2
3
4
5
6
7
8
1
प्रा० वि० यादव टोला , नुआपाड़ा
-
-
1
-
2
-
-
-
2
मध्य विद्यालय , मकदूनियाई
-
-
-
1
-
6
5
-
3
उत्क्रमित म० वि०, माखान्या
-
-
-
-
2
4
1
2
4
प्रा० वि० , लातापर
-
-
-
3
-
-
-
-
5
प्रा० वि० , शौगढ़
-
-
-
-
1
-
-
-
6
प्रा० वि० , मदुपुर
-
-
-
-
2
-
-
-
7
मध्य वि० , खुसरू
-
-
-
-
1
-
5
6
8
उत्क्रमित मध्य वि० , जालन
-
-
-
-
-
2
-
-
9
नवसृजित प्रा० वि० , विर्वन
-
-
-
1
-
-
-
-
10
मध्य वि० , कन्कर
-
-
-
1
1
-
-
7
Note:- आप शिक्षकों से निवेदन है कि आप अपने आस-पास के विद्यालय का ही नाम और संख्या दर्शाए l यहाँ चार्ट में दिखाया गया नाम और संख्या सिर्फ example है l 

बच्चों के विद्यालय से बाहर रहने के कारण –

1. अधिक दूरी – मैंने देखा कि प्राथमिक विद्यालयों की अपेक्षा मध्य विद्यालयों में बच्चों का ड्राप आउट दर अधिक है l इसका एक बहुत बड़ा कारण है कि अधिकांश मध्य विद्यालय उनकी पहुँच से दूर है l अधिक दूरी तथा भौतिक सुविधाओं के अभाव के कारण कुछ बच्चे बीच में ही विद्यालय छोड़ चुके थे l
2. गरीबी - अधिकांश बच्चे ऐसे हैं जो गरीब होने के कारण काम करके पैसे कमाना चाहते हैं l ड्राप आउट लिस्ट में अधिकांश लड़कियां हैं जो अपने माता-पिता के कारण तथा छोटे बच्चों की देखभाल के लिए घर में रहने को विवश है l गरीबी तथा आधुनिक प्रौद्योगिकी की कमी के कारण अधिकांश माता-पिता अपने बच्चों को खेतों में काम करने के लिए या मजदूरी करने के लिए भेज देते हैं l
3. संप्रेषण का अभाव – भौगौलिक दृष्टिकोण से कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जहाँ उचित शिक्षा व्यवस्था सरकारी एजेंसियों के लिए भी कठिन कार्य है l उचित शिक्षा अभाव में बहुत बच्चे स्कूल से पढाई पूरी किये बिना ही बाहर हो जा रहे हैं l
4. बेरोजगारी – बहुत से अभिभावकों में यह नकारात्मक विचार बैठा हुआ है कि पढ़ लिख कर तो बेरोजगार ही रहना है फिर ज्यादा पढने का क्या फायदा l अभिभावकों का यह नकारात्मक विचार भी बच्चों को विद्यालय भेजने से रोकता है l
5. अपव्यय तथा प्रगतिरोध – अपव्यय तथा प्रगतिरोध बच्चों की प्रारंभिक स्तर तक की शिक्षा में बहुत बड़ी बाधा उत्पन्न करते हैं l
6. जागरूकता की कमी तथा अज्ञानता – हमारे समाज में बहुत से अभिभावक मानव जीवन में शिक्षा के महत्त्व को महसूस नहीं करते और अपनी इन्हीं अज्ञानता और जागरूकता  की कमी के कारण वे अपने बच्चों को या तो विद्यालय में नामांकित ही नहीं कराते या नामांकित बच्चों को भी विद्यालय से खींच लेते हैं l 
7. असमानता - मैंने देखा कि कई विद्यालयों में नामांकित बच्चों के लिंगानुपात में बहुत बड़ा अंतर है l लड़कों की अपेक्षा लड़कियों की संख्या काफी कम है l मैंने यह भी देखा कि विद्यालय में उपस्थित अधिकांश बच्चे गरीब व पिछड़े तबके से ताल्लुक रखते हैं l पता चला कि समाज के उच्च और अमीर तबके के लोग अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाते हैं l इन्हीं लिंग असमानता , सामाजिक भेदभाव तथा आर्थिक विषमताओं के कारण बच्चे हीन भावना के शिकार हो विद्यालय छोड़ देते हैं l
8. आधारभूत संरचना की कमी – विद्यालय भ्रमण के दौरान मैंने देखा कि सबसे बड़ा मुददा जो सभी विद्यालयों में एक समान था – आधारभूत संरचना की घोर कमी l सभी में पर्याप्त भवनों का अभाव था , किसी में चहारदीवारी था तो किसी में नहीं l शौचालयों की पर्याप्त सुविधाओं का अभाव तथा खेलकूद के लिए पर्याप्त मैदान की कमी लगभग सब में एक समान था l पर्याप्त बेंच डेस्क के अभाव में बच्चे जमीन पर बैठ कर पढने को मजबूर थे l प्राथमिक विद्यालय में तो बच्चे किसी तरह जमीन पर बैठ कर पढ़ लेते हैं लेकिन मध्य विद्यालयों में जमीन पर बैठकर पढने में उदासीन रहते हैं l इस कारण भी वे पढाई के प्रति उत्साहित नहीं रहते l
9. अप्रशिक्षित और अपर्याप्त अध्यापक – मैंने विद्यालय भ्रमण के दौरान देखा कि सभी विद्यालयों में बच्चों के अनुपात में पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं l जो शिक्षक हैं भी तो उनमें से अधिकांश अप्रशिक्षित हैं l अब एक तो अपर्याप्त शिक्षक के कारण पूरी पढाई नहीं हो पाती दूसरी ओर अप्रशिक्षित अध्यापकों के कारण गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बात भी बेमानी है l इस कारण जब बच्चे प्राथमिक शिक्षा पास कर मध्य विद्यालय में जाते हैं तो उनमें वाजिब गुणवत्ता के अभाव में आगे की पढाई उन्हें पहाड़ जैसा मुश्किल प्रतीत होता है और वह पढाई बीच में ही छोड़ने में अपनी भलाई समझते हैं l 


बच्चों के विद्यालय में ठहराव हेतु सुझाव 

कहते हैं कि समस्या का पता चल जाए तो समाधान अवश्य हो सकता है l इसी सन्दर्भ में मैं कह सकता हूँ कि उपरोक्त वर्णित समस्याओं के आधार पर बच्चों के ड्राप आउट दर को कम करने तथा विद्यालय में उनके ठहराव हेतु निम्नलिखित उपाय किये जा सकते हैं l
1. विद्यालयों में बच्चों के नामांकन दर को बढ़ाने तथा बच्चों के ठहराव हेतु उचित दूरी पर या उनके टोला या बसाव क्षेत्र में ही विद्यालय स्थापित करने के लिए सरकारी स्तर पर गंभीर पहल होना चाहिए l
2. विद्यालयों में लैंगिक असमानता को कम करने के लिए माता-पिता तथा अभिभावकों को जागरूक करने की आवश्यकता है l उन्हें यह समझाने की जरुरत है कि बेटा या बेटी में कोई फर्क नहीं है l आज बेटी किसी भी क्षेत्र में बेटों से कम नहीं हैं l इस कार्य में स्थानीय जनप्रतिनिधि का भी भरपूर सहयोग लिया जाना चाहिए l
3. गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए सरकार विद्यालयों में पर्याप्त योग्य शिक्षकों की बहाली करें , ठेका पर बहाली की प्रक्रिया को बंद करें, बहाल अप्रशिक्षित शिक्षक को प्रशिक्षित करें, आधारभूत संरचना जैसे पर्याप्त भवन , ब्लैक बोर्ड , शौचालयों की सुविधा, बैठने की व्यवस्था तथा खेल कूद के लिए पर्याप्त जमीन की व्यवस्था करें l
4. विद्यालयों में सामाजिक भेदभाव को कम करने के लिए समाज के बुद्धिजीवी वर्गों को आगे लाकर विद्यालय प्रबंधन में उनकी सहभागिता को बढ़ाने में स्थानीय शिक्षकगण तथा पदाधिकारी उचित सहयोग प्रदान कर सकते हैं l
5. शिक्षा का अधिकार नियम, 2009 को सख्ती से लागु किया जाए l विभिन्न सरकारी योजनाओं जैसे छात्रवृति , पोशाक, साईकिल इत्यादि की सुविधा को पारदर्शी तरीके से लागु किया जाए l 

उपरोक्त विश्लेषण के आधार पर यह कहा जा सकता है कि ड्राप आउट की समस्या लाईलाज नहीं है और इसपर काबू पाया जा सकता है l 



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