Short Motivational Story-कोई किसी का नहीं होता

Admin 6:50 pm
एक बार एक साधु भिक्षाटन करते किसी गाँव से गुजर रहा था l वह जब भी किसी के दरवाजे पहुँचता तो बोल पड़ता – “कोई किसी का नहीं होता” l भिक्षा मिलने के बाद वह अन्य दरवाजे जाता और अपनी वही बात दोहराता l

इसी क्रम में बढ़ते हुए वह एक सेठ के यहाँ पहुंचा l सेठ अपने हिसाब-किताब के कार्यों में व्यस्त था l भीख में उसने साधु को एक दस रूपये का नोट थमा दिया l साधु नोट रखते हुए बोला – “कोई किसी का नहीं होता l”

सेठ को आश्चर्य हुआ l उन्होंने उसे रोका और अपने नौकर को उसे भोजन कराने का आदेश दिया l कुछ ही देर में साधु के सामने भोजन हाजिर था l साधु ने बिना कुछ बोले भोजन ग्रहण किया और चलते वक्त फिर से वही बात दोहराया – “कोई किसी का नहीं होता l”

सेठ को पुनः आश्चर्य हुआ पर इस वक्त वह कुछ गुस्से में भी था l उन्होंने साधु से कहा – आप यह कैसे कह सकते हैं कि कोई किसी का नहीं होता ? मैंने आपको पैसे दिए , भोजन कराया , फिर भी आप कहते हैं कि कोई किसी का नही होता !

साधु ने शालीनता से जवाब दिया – बेटा , यही सत्य है l तुम्हारे सबसे अपने भी तुम्हारा नहीं है , अगर यकीन न हो तो मैं तुम्हें साबित कर के दिखा सकता हूँ l लेकिन इसके लिए तुम्हें मेरे कहे अनुसार एक नाटक करना होगा l

साधु से पूरी योजना समझने के बाद सेठ ने सहमती दे दी और नाटक शुरू हो गया l अगले ही क्षण सेठ मर चुका था l देखते ही देखते पुरे घर में हाहाकार मच गया l घरवालों का रो-रो कर बुरा हाल था l

साधु ने घरवालों से कहा कि मेरे पास इन्हें जिन्दा करने की अचूक नुस्खें हैं l अगर आप चाहे तो मैं उसे आजमा सकता हूँ l इस वक्त कौन नहीं चाहता कि सेठ पुनः जिन्दा हो चाहे उसके लिए जो कुछ भी करना पड़े l
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साधु ने गोमूत्र मंगाया और कुछ मंत्र बुदबुदाकर सभी घरवालों से कहा – “इसे जो कोई भी पिएगा उसके तत्काल बाद ही सेठ जीवित हो जायेगा l लेकिन, इसे पीने वाले की तुरंत ही मौत हो जाएगी l”

घर में कोई इस कार्य को करने के लिए तैयार नहीं था l सभी का इंकार करने के पीछे यही एक गोलमोल जवाब था कि जिसका समय आ गया उसको तो जाना ही है ,फिर क्योँ कोई और अपनी जान गवांये l

अंत में साधु ने उसे बुलाया जो एक व्यक्ति के लिए सबसे खास और दो जिस्म एक जान होते हैं अर्थात पत्नी l साधु ने पत्नी से आग्रह किया कि तुम इसे पी कर अपने पति को वापस ले आओ l तब पत्नी ने जो जवाब दिया वह चौकाने वाला था l

“ उन्हें वापस लाकर क्या फायदा जब मैं ही न रहूंगी l वैसे भी इन्होने जो सम्पति अर्जित की है वह अपने बीबी और बच्चों के लिए ही तो की है l मैं जीवन भर यह मान के चलूंगी कि नियति को यही मंजूर था l” पत्नी ने कहा l

पत्नी के शब्द सेठ के कानों में पड़ते ही वह उठ खड़ा हुआ l क्योंकि वह तो मरने का नाटक किया हुआ था l उठते ही सेठ साधु के पैर पकड़ लिए और कहा – “ महाराज ! मुझे अपने शरण में ले लीजये l मैं समझ गया कि इस दुनिया में सभी मोहजाल में फंसे हैं l आप सही कह रहे थे कि इस दुनिया में कोई किसी का नहीं होता l”

सेठ सबकुछ त्याग कर साधु के साथ भिक्षुक बनने और सिद्धि को प्राप्त करने निकल पड़ा l
“भूत, भविष्य और वर्तमान से मुक्त होकर जीवन के अंत में पहुँचने पर जब मन सभी संबंधों से मुक्त हो जाए तब तुम्हें फिर से जन्म और क्षय से नहीं गुजरना पड़ेगा l” – महात्मा बुद्ध  

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