धैर्य - Short Story in Hindi - Dhairya

Chandan 9:46 pm
एक गाँव में एक किसान रहता था जिसका नाम धर्मी था l गाँव में किसानी के लिए सिंचाई की घोर कमी थी l अतः वह किसान अपना एक कुआँ खोदना चाहता था l सही जगह देखकर उसने कुआँ खोदना शुरू किया l दस -बारह हाथ जमीन खोदकर भी जब पानी नहीं दिखाई दिया तो वह निराश हो गया l सोचा यहाँ के जमीन में पानी ही नहीं है l जगह बदल कर दूसरे जगह गड्ढा खोदने लगा l वहां भी दस-बारह हाथ खोदने के बाद पानी दिखाई नहीं दिया तो तीसरे जगह खोदने लगा l इस तरह आठ -दस जगह खोदने के बाद भी पानी का कहीं अता-पता न पाकर वह काफी निराश हो गया और थक - हारकर घर लौट गया l

अगले दिन उसने सारी बात एक बड़े बुजुर्ग को बताई तो बुजुर्ग ने पहले हँसा फिर उसे समझाते हुए कहा - तुमने दस जगह दस-दस हाथ गड्ढा खोदकर एक सौ हाथ गड्ढा खोद डाला l यदि तुम अलग-अलग न खोदकर एक ही स्थान पर गड्ढा खोदते रहते तो इतना खोदना भी नहीं पड़ता और तुम्हें पानी भी अवश्य ही मिल जाता l वास्तव में तुमने धैर्य से काम नहीं लिया l थोड़ा-थोड़ा खोदकर अपना निर्णय बदल लिया l मेरी मानो , आज तुम एकाग्रता और धैर्य से एक ही स्थान पर गड्ढा खोदो और जब तक पानी न मिले तब तक खोदना जारी रखो l

उस बुजुर्ग की बात मानकर धर्मी ने आज पुनः गड्ढा खोदना शुरू किया l और , पचीस हाथ खोदने के बाद ही उसे पानी मिल गया l

इसलिए , मनुष्य कोई भी काम यदि धैर्य और एकाग्रता से करे तो उसे सफलता अवश्य ही मिलती है l

अनमोल वचन - "कार्य कितना बड़ा हो , मनुष्य उसे करना चाहता हो तो सिंह की तरह दृढ निश्चय के साथ आरम्भ करे और पूरा करके छोड़े l"

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