Karm Ka Fal - A Motivational Short Story in Hindi - कर्म का फल

एक युवक घोड़े पर सवार होकर जंगल के रास्ते शहर जा रहा था l रास्ते में उसे एक घायल नेवला मिला l युवक को उस छोटे जीव पर दया आ गयी l वह घोड़े से निचे उतरा और उस घायल नेवले को उठाकर पेड़ की छाँव में ले गया l अपने पास में रखे पानी को अपने हाथों से नेवले के मुंह में पिलाया l कुछ देर में नेवले को होश आ गया l युवक ने उसे छोड़ दिया और वह नेवला धीरे से झाड़ी में चला गया l वह युवक फिर घोड़े पर सवार होकर चला गया l उसने इसे एक सामान्य घटना समझ कर भूला दिया l

कुछ दिनों बाद वही युवक घोड़े पर सवार होकर उसी जंगल के रास्ते से लौट रहा था l रास्ते में एक सर्प पड़ा था l अचानक घोड़े का पैर सर्प से लग गया l इससे सर्प क्रोधित होकर बदला लेने के लिए घोड़े के पीछे तेजी से चलने लगा l वह उस घोड़े और उस पर सवार युवक को डसना चाहता था l युवक इन बातों से अनजान चला जा रहा था l सर्प और घोड़े के बीच का फासला निरंतर कम होता जा रहा था l तभी झाड़ियों से एक नेवला निकला l उसने सर्प पर हमला कर उसे मुँह में दबोच लिया l दोनों में लड़ाई शुरू हो गयी l थोड़ी ही  देर में सर्प के टुकड़े - टुकड़े हो गए l इस हलचल से युवक ने पीछे मुड़कर देखा तो एक लम्बे साँप को मरा देखकर राहत की साँस ली l उसने उस नेवले को झाड़ियों में जाते देखा l तब उसको पुरानी बात याद आ गयी कि उसने एक घायल नेवले को पानी पिलाकर उसकी जान बचायी थी l आज इसने मेरी जान बचायी है l

यह युवक के अच्छे कर्म का ही फल था कि उसके जीवन की रक्षा हो पाई l

गीतोपदेश :- "निष्काम भावपूर्ण केवल दूसरों के हित के लिए अपने कर्तव्य का तत्परता से पालन करने मात्र से कल्याण हो जाता है l"

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