आओ मूर्ख - Kaalidas Short Story in Hindi-AAO MURKH

एक दिन राजा भोज अचानक अपनी पटरानी के कक्ष में पहुँच गए जहाँ रानी और उनकी सखी एकान्त में वार्तालाप कर रही थीं l राजा को अचानक आया देख रानी बोली - "आओ मूर्ख" l

यह सुनकर राजा चकित हो गए और विचार करने लगे कि मुझसे ऐसी कौन सी मूर्खता हो गयी कि रानी ने मुझे अपशब्द कह दिए l मैंने ऐसी कौन सी मूर्खता का कार्य किया है , समझ नहीं आता l संभव हो इसका कोई विशेष अर्थ हो l यह विचार कर राजा वहाँ से वापस लौट गए l

दूसरे दिन राजा भोज अपने दरबार में सिंहासन पर बैठे थे l उनकी सभा में कुल चौदह सौ पंडित थे l उस समय दरबार में जो भी पंडित आता , राजा उससे कहते - "आओ मूर्ख" l पंडितों ने मन में विचारा कि , हमें मूर्ख कहने में राजा का क्या कारण है ? बिना कुछ बोले सभी पंडित विस्मित होकर शांत बैठ जाते l कुछ देर बाद सभा में कालिदास आये तो उनसे भी राजा ने उसी प्रकार कहा - "आओ मूर्ख" l

तब कालिदास ने तत्काल ही उत्तर दिया - मैं खाते हुए रास्ते में चलता नहीं , अधिक हँसते हुए बोलता नहीं ,किसी गयी हुई वस्तु का शोक नहीं करता , अपने किये कार्य पर अभिमान नहीं करता और जहाँ दो लोग बातचीत करते हों वहाँ मैं जाता नहीं l इन पाँचों में से मुझसे एक भी मूर्खता नहीं हुई l फिर हे राजन ! आपने मुझे मूर्ख किस प्रकार कहा ?

यह उत्तर सुनकर राजा समझ गए कि जब दो लोग वार्तालाप कर रहे थे तो मैं वहाँ चला गया था , इसलिए मैं मूर्ख हुआ l

राजा ने कालिदास को अपनी पिछले दिन की मूर्खता की सारी बात बताई तो कालिदास समझ गए और हँसने लगे l

अनमोल वचन - "परखने के लिए कोई चीज है तो ' बुद्धि '  l"

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