विश्व मानवाधिकार दिवस | Vishwa Manavadhikar Divas | World Human Rights Day |

Chandan 9:58 pm
                                                             Vishwa Manav Adhikar Divas
आज 10 दिसम्बर है l विश्व मानवाधिकार दिवस-world human rights day l आज ही के दिन 1948 ईo में  संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सम्पूर्ण विश्व के मानव जाति के लिए उनके सम्पूर्ण अधिकारों के लिए एक घोषणापत्र लागू किया था l तब से लेकर प्रत्येक वर्ष उनके सम्मान में 10 दिसम्बर को विश्व मानव अधिकार दिवस  के रूप में मनाया जाता है l भारत ने 1993 ईo में मानवाधिकार आयोग का गठन कर इसे एक क़ानून के रूप में लागू किया l

इस दिन पूरे विश्व में राजनैतिक बैठकें तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं l इसी दिन मानव अधिकारों के सन्दर्भ में किये गए कार्यों के लिए पूरे विश्व से पांच व्यक्तियों या संस्थाओं को उनके योगदान के लिए संयुक्त राष्ट्र द्वारा पुरष्कृत भी किया जाता है l

बात अगर भारत के सन्दर्भ में किया जाए तो हम देखते हैं कि हमारा संविधान भी हमें मूलभूत अधिकारों से परिपूर्ण करता है , लेकिन मानव अधिकारों के हनन में भी यह देश पीछे नहीं है l आजादी के इतने सालों बाद भी बंधुआ मजदूरी को पूरी तरह से ख़त्म नहीं किया जा सका है l बाल मजदूरी जो एक मासूम की जिंदगी के साथ खिलवाड़ है , वह भी खुलेआम  होता है l गरीबी , अशिक्षा , बेरोजगारी आज भी मुंह बाए खड़ी हैं l रोटी , कपड़ा और मकान जो लोगों की मूलभूत आवश्यकताएँ हैं वह भी हमारी सरकार पूरी नहीं कर पा रही है l शिक्षा का अधिकार , भोजन का अधिकार , रोजगार का अधिकार , स्वच्छ जीवन का अधिकार , ये सभी बुनियादी अधिकारों का हनन होना आज के तिथि में एक घिनौना पाप है l


अगर आज भी हमारे देश के लोगों को जाति के नाम पर , धर्म के नाम पर , संप्रदाय के नाम पर , क्षेत्र के नाम पर भेदभाव का शिकार होना पड़ता है तो लानत है इस देश के लोगों पर और यहाँ की सरकार पर l सरकार की बात कौन करें l सरकार ही तो है जो यह सब सालों पूर्व ख़त्म कर सकती थी लेकिन नहीं , सरकार और सरकार में बैठे उनके अफसर इनके अधिकारों की रक्षा नहीं करते बल्कि अधिकतर मामलों में अत्याचारियों , बाहुबलियों , अमीरों का साथ देकर बेबस और लाचार लोगों पर बर्बर व्यवहार करते है l आज भी देश में बहुत सारे ऐसे जगह हैं जहाँ लोग खुलकर साँस भी नहीं ले पा रहे हैं l वे हर दिन राज्य के पुलिस और सैनिकों के मनमाने उपद्रवों के शिकार रहें हैं l
manav adhikar divas

हद तो तब हो जाती  है जब लोगों के अभिव्यक्ति के अधिकारों का दमन हो जाता है l लोग अपने विवेक के अधिकार के इस्तेमाल पर भी डर महसूस करने लगते हैं l दुनियाँ के सबसे बड़े लोकतंत्र में लोगों को अपने दिल की बात बोलने और अपनी आस्थाओं को बरक़रार रखने पर भी देशद्रोह जैसे आरोप लगाकर बेइज्जत किया जाता है l

यह सब करतूत निःसंदेह ही स्वार्थपूर्ण राजनीति के चलते होती है l इसे हर व्यक्ति को समझने की जरूरत है l मानव अधिकारों के साथ उनके कर्तव्य भी जुड़े होते हैं , उनका भी पालन अतिआवश्यक है l विश्व मानवाधिकार दिवस इन्ही मानवीय अधिकारों को बरक़रार रखने और उनके हनन के खिलाफ आवाज बुलंद करने के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष 10 दिसम्बर को मनाया जाता है l

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