खम्भे के शीर्ष पर सिद्धि | A Short Moral Story In Hindi |

एक बार सर्कस कलाकारों की एक मंडली जो एक शहर से दूसरे शहर घूम-घूम कर प्रदर्शन किया करते थे , को राजा ने अपने दरबार में प्रदर्शन करने के लिए बुलाया l मंडली के कलाबाजों और बाजीगरों के बीच एक आकर्षक युवती थी जो बहुत ही चपलता के साथ एक लम्बे खम्भे के शीर्ष पर नाच कर रही थी l दर्शकों के बीच युवकों में से एक युवक जिसका नाम Uggasena था को उस युवती से प्यार हो गया l और अंततः , उन्होंने उससे शादी कर ली l अंत में, जब मंडलियों का दूसरे शहर में पलायन का समय तय हुआ , वह और उसकी नई पत्नी भी उनके  साथ जाने को तैयार हो गया l  

Uggasena के पास हांलांकि कोई खास प्रतिभा नहीं था जिसका सर्कस में उपयोग किया जा सकता था , इसलिए वह बक्से पैकिंग करने , गाड़ियाँ चलाने और अन्य सेवकों वाला कार्य करने लगा l यह सब उसकी पत्नी को बुरा लग रहा था l 

कुछ दिनों बाद उन्हें एक लड़का पैदा हुआ l एक दिन , Uggasena ने सुना कि उसकी पत्नी बच्चे को लोरी के रूप में ये शब्द सुना रही थी – “गरीब बच्चा ! तुम्हारे पिता सिर्फ गाड़ियाँ चलाने और बक्से ढोने का काम ही कर सकते हैं l तुम्हारे पिता सही मायने में बेकार हैं l”

वह सोच रहा था कि उसकी पत्नी का यह अहंकार उसके एक कलाबाजी के कौशल के कारण था l उसने भी उसकी तरह बनने का निर्णय लिया l उसने अपने ससुर से कहा के वे उन्हें प्रशिक्षित करें l और , बहुत ही कम समय में वह भी कला दिखाने के लिए पूरी तरह तैयार हो गया l अपने प्रदर्शन के दिन . वह उसी लम्बे खम्भे पर चढ़ गया और खम्भे के शीर्ष पर अपनी कलाबाजी दिखाने लगा l दर्शक उसके हॉरर को देखकर ख़ुशी में डूबा हुआ था l 

संयोगवश , जब वह प्रदर्शन कर रहा था , बगल से महात्मा बुद्ध गुजर रहे थे l बुद्ध ने देखा कि Uggasena निर्वाण के लिए योग्य पुरुष हो चुका है l अतः उन्होंने दर्शकों का ध्यान अपने इच्छाशक्ति से Uggasena की तरफ से खींच लिया और उसे खम्भे के शीर्ष पर उपेक्षित छोड़ दिया l अब उसे दर्शकों का एक भी ताली नहीं मिल रहा था l Uggasena ने सोचा कि अगर उसकी पत्नी को पता चलेगा कि दर्शकों का उनकी कला में कोई रूचि नहीं है तो वह उनपर हँसेगी l यह सोचकर वह व्याकुल हो उठा और उसी खम्भे पर स्तब्ध रह गया l 

तब बुद्ध ने उसे पास बुलाया और कहा – “एक बुद्धिमान व्यक्ति लगाव के सभी रूपों को छोड़कर लगन से काम करें तो फिर से पैदा होने से मुक्त हो जायेगा l”

Uggasena बुद्ध के शब्दों पर परिलक्षित होकर खम्भे के शीर्ष पर बैठे-बैठे ही निर्वाण(सिद्धि) को प्राप्त कर लिया l 


“भूत, भविष्य और वर्तमान से मुक्त होकर जीवन के अंत में पहुँचने पर जब मन सभी संबंधों से मुक्त हो जाए तब तुम्हें फिर से जन्म और क्षय से नहीं गुजरना पड़ेगा l” – महात्मा बुद्ध 



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