कृतघ्न बेटा | Inspirational Story in Hindi Language | Short Story in Hindi Inspirational |

एक बार एक बूढ़ा व्यक्ति था जिनके चार बेटे थे l जब चारों बेटे की शादी हो गई तब उस बूढ़े व्यक्ति ने अपनी सम्पति का कुछ हिस्सा शादी के उपहार स्वरुप चारों बेटे को दिया और शेष सम्पति अपने जीवन यापन के लिए सुरक्षित रख लिया l 

जब बूढी पत्नी का देहांत हो गया तब चारों बेटे ने बहुत ही अच्छी तरह से अपने बूढ़े पिता का ख्याल रखना शुरू किया l ऐसा करने के पीछे उनलोगों का एक खास मकसद भी था l वे चारों अपने पिता की बची हुई सम्पति हासिल करना चाहते थे l और इस कार्य में वे लोग सफल भी हो गए l अब उस बूढ़े बाप के लिए कुछ भी नहीं बचा l 

अपनी असहाय जिंदगी काटने के लिए पिता ने बड़े बेटे के पास रहना शुरू किया l लेकिन कुछ दिन बिता ही था कि उनकी बहू ने उन्हें घर से निकाल दिया , क्योंकि वह एक अनावश्यक बोझ नहीं ढोना चाहती थी l जले में नमक तो तब लगा जब नमकहराम बेटा ने पत्नी का विरोध नहीं किया l वह निःसहाय बूढ़ा व्यक्ति बाकि तीनों बेटे के साथ रहना चाहा लेकिन वहाँ से भी उन्हें वही परिणाम मिला l 

असहाय और दुखी पिता सांत्वना और सलाह की खोज में भगवान बुद्ध के पास पहुँच गया l जब उसने अपनी सारी आपबीति बुद्ध से सुनाई तब भगवान बुद्ध ने उन्हें उनके लालची और कृतघ्न बेटे को सबक सिखाने के लिए एक उपाय बतलाया l बुद्ध ने उन्हें निर्देश दिया कि जब वह कहीं भीड़ में हो तो ये वाक्य दोहराए – “मेरे सभी बेटे निर्दयी और धूर्त हैं l वे मुझे पिता बुलाते हैं लेकिन वे इस शब्द का मतलब नहीं समझते l अब जब मैं उन्हें अपनी सारी सम्पति दे चुका हूँ वे मुझे अपनी पत्नी के साथ मिलकर घर से बाहर निकाल दिए , और मेरे साथ भिखारियों जैसा बर्ताव कर रहे हैं l काश ! मैं अपने कुटिल बेटों की जगह खुद के पुरानी हड्डियों पर खड़ा रह पाता !”

बुद्ध के निर्देशों का पालन करने के लिए बूढ़े पिता मौके की तलाश में निकल पड़ा l एक दिन वह ऐसे भीड़ में पहुँच गया जिसमें उनका चारों बेटा भी शामिल था l पिता ने बुद्ध के बताये शब्दों को जोर–जोर से लोगों को सुनाना शुरू कर दिया l लोगों ने उनके दुःख दर्द को जानकर सांत्वना देना शुरू किया साथ ही उनके बेटे के प्रति जबरदस्त आक्रोश दिखाया l भीड़ में मौजूद उनका बेटा स्थिति को भाँपकर जान बचा कर भाग खड़ा हुआ l  

चारों भागता हुआ जब निश्चिंत हो गया कि अब वह खतरे से बाहर है, तो वहीँ बैठ कर पिता के दयनीय स्थिति के बारे में चिंतन करने लगा l उनलोगों ने शर्मिंदगी के साथ स्वीकार किया कि वे अपने पिता के प्रति कृतघ्न और नमकहराम हैं जबकि उनके पिता कितने अच्छे और दयालु हैं l ग्लानिपूर्वक वे अपने पिता को खोजने चल दिए और पिता को पाकर उनसे माँफी माँगने लगे l उन्होंने वादा किया कि वे उनकी देखभाल करेंगे और उन्हें आदर और सम्मान देंगे जैसा कि एक पिता को दिया जाना चाहिए l पिता ने उन्हें मांफ कर दिया और वे सभी खुशीपूर्वक घर को लौट गए l घर में सभी बेटों ने अपनी-अपनी पत्नी को हिदायत दी कि पिता के साथ अच्छे से पेश आयें वर्ना................  


“लीक (रास्ता) बनाने के मौसम में कैद किया गया हाथी जिसका नाम धनपाला है, बेकाबू है l कैद में वह एक भी निवाला नहीं खाता है , वह अपने माता-पिता के लिए तरस रहा है l” – महात्मा बुद्ध (धनपाला की कहानी से )

During the rutting season, the elephant called
Dhanapala is uncontrollable. Held in captivity,
he eats not a morsel, yearning for his native
forest.” –Mahatma Buddha

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