मिथ्या अहंकार - Short Stories in Hindi

पुराने समय की बात है l कबूतर अपने अंडे झारियों में दिया करते थे, पर लोमड़ी उनके अंडे खा जाया करती थी l दूसरे पक्षियों ने उन्हें सीख दी कि अंडे घोंसले में रखा करो l बात कबूतरों को जँची l बहुत विचार विमर्श के बाद उन्होंने चिड़ियों को घोंसला बनाने के प्रशिक्षण को देने के लिए आमंत्रित किया l चिड़ियों ने घोंसला बनाना प्रारंभ ही किया था कि कबूतर बोले – ‘’अरे ! ये तो बड़ा आसान है l हम खुद बना लेंगे l “ चिड़ियाँ वापस लौट गई, पर जब कबूतरों ने घोंसला बनाने का प्रयत्न किया तो विफल रहे l चिड़ियों को पुनः प्रशिक्षण हेतु बुलाया गया l चिड़ियों ने घोंसला आधा ही बनाया था कि कबूतर बोले – “बस, चिड़ियाँ बहन ! ये तो हम पहले से ही जानते थे, आगे हम बना लेंगे l” चिड़ियाँ फिर लौट गई l इस बार प्रयास करने पर भी जब कबूतरों से घोंसला नहीं बना तो वे चिड़ियाँ को बुलाने गए, पर वे बोलीं- “जो जानता कुछ नहीं, पर मानता ये है कि मैं सब कुछ जानता  हूँ, उस मूर्ख को कोई कुछ नहीं सिखा सकता l”


नासमझ कबूतर झूठे अहंकार की वजह से घोंसला बनाना नहीं सीख पाए और इसलिए आज भी उनके घोंसले अन्य पक्षियों की तुलना में बेढब बनते हैं l 



नोट:-अगर आपके पास भी कोई प्रेरक प्रसंग या कथा है तो आप हमे भेज सकते है l मौलिक रचनाओं को प्राथमिकता के साथ प्रकाशित की जाएगी l प्रकाशन में अपना नाम,फोटो और वेबसाइट लिंक (यदि कोई है) तो जरुर भेजें l अपनी रचनाएँ हमें email करें - welovehindi@gmail.com 

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