गाँधी 150: महात्मा गाँधी की प्रासंगिकता और भारतीय राजनीति में गांधीवाद का महत्व |

महात्मा गाँधी की प्रासंगिकता और भारतीय राजनीति (RELEVANCE OF MAHATMA GANDHI AND INDIAN POLITICS) - आज का यह आलेख आधुनिक समाज में गांधी दर्शन की प्रासंगिकता और भारतीय राजनीति में गांधीवाद की प्रासंगिकता की जाँच करता है l दो अक्टूबर 2019 को  गाँधी जी की 150 वीं जयंती पर गांधीवाद की प्रासंगिकता पर निबंध आपको जरुर पसंद आयेगा l

महात्मा गाँधी की प्रासंगिकता


महात्मा गाँधी की प्रासंगिकता


भारतीय राजनीति में जिस महापुरुष का नाम सर्वाधिक आदर और निष्ठा से लिया जाता है, वे हैं - राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी l महात्मा गाँधी को भारतीय जनमानस अत्यधिक प्रतिष्ठा देता है तथा उन्हें 'बापू' कह कर पुकारता है l बापू भारतीय राजनीति के उस धवल नक्षत्र का नाम है, जिसने पहली बार सत्य और अहिंसा को राजनीति का आयाम निर्धारित किया l गाँधी जी पहले राजनेता थे, जिन्होंने जनता की शक्ति को पहचाना l जनता पर उनका असीम विश्वास था l वे मानते थे कि आम आदमी यदि सत्यनिष्ठा से अपने अधिकार के लिए संघर्ष करे तो बड़ी से बड़ी शक्ति को झुकने में अधिक समय नहीं लगता है l

आधुनिक समाज में गांधी दर्शन की प्रासंगिकता


वर्तमान समय में भारतीय राजनीति एक दोराहे पर खड़ी है l राजनीति का कार्य समाज को दिशा-निर्देश देना है, उसे नेतृत्व प्रदान करना है l जैसी राजनीति होगी वैसा ही समाज विकसित होगा l समाज की प्रवृतियाँ राजनीति की प्रकृति पर निर्भर है l पहले जब राजनीति स्वच्छ थी, राजनेता ईमानदार तथा निष्ठावान थे, समाज में वैसी विसंगतियाँ तथा विषमताएँ नहीं थीं, जैसी आज देखने को मिलती है l

भारतीय राजनीति में गांधीवाद की प्रासंगिकता की जाँच


भारतीय राजनीति में साम्प्रदायिकता, जातिवाद, क्षेत्रवाद जैसे विघटनात्मक तत्वों का प्रवेश लगातार हो रहा है l राजनीतिक दल चुनावी सफलता के लिए इन तत्वों का सहारा ले रहे हैं l अपराधियों ने राजनीति में अपने लिए जमीन तैयार कर ली है l इन सबका असर समाज पर भी देखने को मिल रहा है l राजनीति की समाज सेवा वाली छवि धूमिल हुई है और नेता इसे अपने लिए प्रभावी व्यवसाय मानने लगे हैं l यही वह समय है जब गाँधी और उनके सिद्धांतों को अपना मार्गदर्शक बनाने की जरूरत है l

महात्मा गाँधी ने अपनी राजनीति दक्षिण अफ्रीका से प्रारम्भ की l रंगभेद के विरुद्ध आन्दोलन का नेतृत्व करते हुए, उन्होंने समाज के वृहद् वर्ग को संघर्ष की चेतना प्रदान की l सत्य और अहिंसा के माध्यम से अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के किये जनमानस को तैयार किया l

1915 ई० में भारत आने पर गाँधी जी के सामने गुलाम भारत की पीड़ित जनता थी l किसानो-मजदूरों की गहन समस्या थी l गरीबी और बेरोजगारी के बीच स्वराज्य की बुनियाद डालना कठिन था l दरिद्रता से जकड़ी जनसंख्या को स्वतंत्रता के लिए जागृत करना आसान नहीं था l

गाँधी जी ने इस समस्या को चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए भारतीय जनता में नया उत्साह तथा नवीन जोश भरने का कार्य किया l सबसे पहले गाँधी जी ने चम्पारण में किसानों के हक़ की लड़ाई लड़ी l गाँव-गाँव में घूम-घूम कर किसानों के दुःख-दर्द को समझा l उनकी पीड़ा को भावनात्मक रूप में अपनाया l इसका भरपूर असर हुआ और गाँधी जी देश के सर्वाधिक प्रभावी नेता बन गए l

स्वतंत्रता आन्दोलन को महात्मा गाँधी ने जन- आन्दोलन बनाया l यह उनकी नेतृत्व क्षमता का ही प्रभाव था कि कांग्रेस ने उन्हें अपना सर्वमान्य नेता मान लिया l देश की जनता ने गाँधी जी को राष्ट्रपिता, बापू इत्यादि उपनामों से प्रतिष्ठित किया l

महात्मा गाँधी ने राष्ट्र को मजबूत बनाने के लिए गाँवों को मजबूत बनाने पर बल दिया l उनका मानना था कि असली भारत गाँवों में निवास करता है और बिना उसके कल्याण के भारत का कल्याण सम्भव नहीं है l

गांधीजी के उस विचार को समझने की आज भी उतनी ही जरूरत है l गाँव की आधारभूत संरचना का विकास आज की अनिवार्यता है l बिना गाँव का विकास किये देश के विकास की बात करना भी बेमानी है l

गाँधी जी ने 'ग्रामोद्योग' तथा CONSTRUCTIVE PROGRAM नाम की अपनी रचनाओं में गाँवों को स्वनिर्भर बनाने की प्रक्रिया पर विचार किया l कृषि के साथ हस्तशिल्प को विकसित कर गाँवों में पूँजी का निर्माण किया जा सकता है l हस्तशिल्पों को बाजार से जोड़ने की जरुरत पर बल दिया गया l शिक्षा तथा स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार पर भी गाँधी जी ने अपने विचार व्यक्त किये l

CONCLUSION


वस्तुतः आज गाँधी जी प्रासंगिक है l उनकी प्रासंगिकता (RELEVANCE) का कारण भारतीय राजनीति में आई असहज प्रवृतियाँ है l राजनीति का विचारहीन होता जाना एक बड़ी समस्या है l विचारधारा की जगह धन-बल तथा जाति-सम्प्रदाय की राजनीति ने ले ली है l अपराधियों ने राजनीति में जगह बना ली है l स्वच्छ राजनीति आज की समस्याओं का समाधान कर सकती है l गाँधीवाद हमारे लिए एकमात्र विकल्प है l इसे अपनाकर ही हम राजनीति को स्वच्छ बना सकते हैं l

हमें उम्मीद है कि "महात्मा गाँधी की प्रासंगिकता" पर यह लेख आपको जरुर पसंद आया होगा l गाँधी जी से संबंधित अपने विचार आप हमें कमेंट में लिखें l इस लेख को अन्य दोस्तों के साथ सोशल मीडिया में शेयर भी करें l

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