महात्मा गाँधी की प्रासंगिकता और भारतीय राजनीति

Mahatma Gandhi ji
RELEVANCE OF MAHATMA GANDHI AND INDIAN POLITICS

भारतीय राजनीति में जिस महापुरुष का नाम सर्वाधिक आदर और निष्ठा से लिया जाता है, वे हैं - राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी l महात्मा गाँधी को भारतीय जनमानस अत्यधिक प्रतिष्ठा देता है तथा उन्हें 'बापू' कह कर पुकारता है l बापू भारतीय राजनीति के उस धवल नक्षत्र का नाम है, जिसने पहली बार सत्य और अहिंसा को राजनीति का आयाम निर्धारित किया l गाँधी जी पहले राजनेता थे, जिन्होंने जनता की शक्ति को पहचाना l जनता पर उनका असीम विश्वास था l वे मानते मानते थे कि आम आदमी यदि सत्यनिष्ठा से अपने अधिकार के लिए संघर्ष करे तो बड़ी से बड़ी शक्ति को झुकने में अधिक समय नहीं लगता है l

वर्तमान समय में भारतीय राजनीति एक दोराहे पर खड़ी है l राजनीति का कार्य समाज को दिशा-निर्देश देना है, उसे नेतृत्व प्रदान करना है l जैसी राजनीति होगी वैसा ही समाज विकसित होगा l समाज की प्रवृतियाँ राजनीति की प्रकृति पर निर्भर है l पहले जब राजनीति स्वच्छ थी, राजनेता ईमानदार तथा निष्ठावान थे, समाज में वैसी विसंगतियाँ तथा विषमताएँ नहीं थीं, जैसी आज देखने को मिलती है l भारतीय राजनीति में साम्प्रदायिकता, जातिवाद, क्षेत्रवाद जैसे विघटनात्मक तत्वों का प्रवेश लगातार हो रहा है l राजनीतिक दल चुनावी सफलता के लिए इन तत्वों का सहारा ले रहे हैं l अपराधियों ने राजनीति में अपने लिए जमीन तैयार कर ली है l इन सबका असर समाज पर भी देखने को मिल रहा है l राजनीति की समाज सेवा वाली छवि धूमिल हुई है और नेता इसे अपने लिए प्रभावी व्यवसाय मानने लगे हैं l यही वह समय है जब गाँधी और उनके सिद्धांतों को अपना मार्गदर्शक बनाने की जरूरत है l

महात्मा गाँधी ने अपनी राजनीति दक्षिण अफ्रीका से प्रारम्भ की l रंगभेद के विरुद्ध आन्दोलन का नेतृत्व करते हुए, उन्होंने समाज के वृहद् वर्ग को संघर्ष की चेतना प्रदान की l सत्य और अहिंसा के माध्यम से अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के किये जनमानस को तैयार किया l 1915 ई० में भारत आने पर गाँधी जी के सामने गुलाम भारत की पीड़ित जनता थी l किसानो-मजदूरों की गहन समस्या थी l गरीबी और बेरोजगारी के बीच स्वराज्य की बुनियाद डालना कठिन था l दरिद्रता से जकड़ी जनसंख्या को स्वतंत्रता के लिए जागृत करना आसान नहीं था l गाँधी जी ने इस समस्या को चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए भारतीय जनता में नया उत्साह तथा नवीन जोश भरने का कार्य किया l सबसे पहले गाँधी जी ने चम्पारण में किसानों के हक़ की लड़ाई लड़ी l गाँव-गाँव में घूम-घूम कर किसानों के दुःख-दर्द को समझा l उनकी पीड़ा को भावनात्मक रूप में अपनाया l इसका भरपूर असर हुआ और गाँधी जी देश के सर्वाधिक प्रभावी नेता बन गए l स्वतंत्रता आन्दोलन को महात्मा गाँधी ने जन- आन्दोलन बनाया l यह उनकी नेतृत्व क्षमता का ही प्रभाव था कि कांग्रेस ने उन्हें अपना सर्वमान्य नेता मान लिया l देश की जनता ने गाँधी जी को राष्ट्रपिता, बापू इत्यादि उपनामों से प्रतिष्ठित किया l

महात्मा गाँधी ने राष्ट्र को मजबूत बनाने के लिए गाँवों को मजबूत बनाने पर बल दिया l उनका मानना था कि असली भारत गाँवों में निवास करता है और बिना उसके कल्याण के भारत का कल्याण सम्भव नहीं है l गांधीजी के उस विचार को समझने की आज भी उतनी ही जरूरत है l गाँव की आधारभूत संरचना का विकास आज की अनिवार्यता है l बिना गाँव का विकास किये देश के विकास की बात करना भी बेमानी है l गाँधी जी ने 'ग्रामोद्योग' तथा CONSTRUCTIVE PROGRAM नाम की अपनी रचनाओं में गाँवों को स्वनिर्भर बनाने की प्रक्रिया पर विचार किया l कृषि के साथ हस्तशिल्प को विकसित कर गाँवों में पूँजी का निर्माण किया जा सकता है l हस्तशिल्पों को बाजार से जोड़ने की जरुरत पर बल दिया गया l शिक्षा तथा स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार पर भी गाँधी जी ने अपने विचार व्यक्त किये l

वस्तुतः आज गाँधी जी प्रासंगिक है l उनकी प्रासंगिकता (RELEVANCE) का कारण भारतीय राजनीति में आई असहज प्रवृतियाँ है l राजनीति का विचारहीन होता जाना एक बड़ी समस्या है l विचारधारा की जगह धन-बल तथा जाति-सम्प्रदाय की राजनीति ने ले ली है l अपराधियों ने राजनीति में जगह बना ली है l स्वच्छ राजनीति आज की समस्याओं का समाधान कर सकती है l गाँधीवाद हमारे लिए एकमात्र विकल्प है l इसे अपनाकर ही हम राजनीति को स्वच्छ बना सकते हैं l


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