महात्मा गाँधी का जीवन इतिहास - Hindi Essay on Life's History of Mahatma Gandhi

Chandan 11:34 pm
History of Mahatma Gandhi
समस्त संसार महात्मा गाँधी को उनके देश प्रेम, त्याग, सत्य, तपस्या, अहिंसा, करुणा, मैत्री भाव, ईमानदारी तथा निष्कपट व्यवहार के लिए जानता है l भारत की स्वतंत्रता के लिए उनका अपना एक विशेष प्रकार का संघर्ष रहा, जिसे सत्य और अहिंसा का मार्ग कहा जाता है l इस हिन्दी लेख के जरिये महात्मा गाँधी के जीवन इतिहास को क्रमबद्ध संकलित करने का प्रयास किया गया है l तो पेश है hindi essay on life's history of Mahatma Gandhi.


राष्ट्रीय स्वतंत्रता के अमर सेनानायक, राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गाँधी था l इनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 ईo को गुजरात के काठियावाड़ प्रायद्वीप के तट पर स्थित पोरबंदर नामक नगर में हुआ था l इनके पिता श्री करमचंद जी पोरबंदर के दीवान और इनकी माता श्रीमति पुतलीबाई बड़ी धर्म परायण महिला थी l

उन्होंने 1876 से 1888 तक पोरबंदर, राजकोट और भावनगर में शिक्षा ग्रहण की l गाँधी जी का विवाह मात्र 13 वर्ष की आयु में श्रीमति कस्तूरबा जी से हो गया l इसी बीच फिर 1885 में उनके पिता जी परलोक सिधार गए l  04 सितम्बर 1888 में कानून की शिक्षा प्राप्त करने के लिए वे विलायत गए, वहाँ से वकालत पास करके वे 12 जून 1891 में भारत लौटे l तब उनकी माता जी का देहांत हो गया l
1892 में गाँधी जी ने राजकोट और बम्बई में वकालत आरम्भ की l 1893 में किसी केस की पैरवी में वे दक्षिण अफ्रीका गए l वहाँ गोरों का भारतीयों और अफ्रीकी लोगों के प्रति दुर्व्यवहार देखकर उन्होंने नेशनल इण्डियन कांग्रेस संगठित की l इसी बीच वे भारत आकर बाल गंगाधर तिलक, गोपाल कृष्ण गोखले और अन्य नेताओं से मिले l 1899 में उन्होंने बोर युद्ध में अंग्रेजों की सहायता की l 1901 में भारत आकर राजकोट में प्लेग - पीड़ित की सेवा की l फिर कलकता कांग्रेस के अधिवेशन में सम्मिलित हुए l 1902 में वर्मा और समस्त भारत का दौरा किया l पुनः दक्षिण अफ्रीका गए, ट्रान्सवाल इण्डिया एसोसिएशन बनाई और इण्डियन नाम का पत्र चलाया l

1906 में जूलू विद्रोह में घायलों की सेवा की और 1907 में सत्याग्रह आरम्भ किया l 1908 में बंदी बनाये गए l 1909 में इन्होंने सुप्रसिद्ध रुसी लेखक एवं समाज सुधारक महात्मा टोलस्टाय से पत्र व्यवहार किया और 1910 में टोलस्टाय फार्म स्थापित किया l सत्याग्रह 1914 तक चलता रहा l कारागार वास और कई-कई दिनों के उपवास के फलस्वरूप जब उन्हें सफलता प्राप्त हुई तब गाँधी जी इंगलैंड गए l उन्हीं दिनों पहला विश्वयुद्ध छिड़ गया l गाँधी जी ने अंग्रेजों की सहायता की l

1918 में रौलट एक्ट के विरोध में गांधीजी के आह्वान पर देश भर में प्रार्थना और उपवास किया गया l 13 अप्रैल 1919 को अंग्रेजी सरकार ने जालियाँवाला बाग़ में एकत्रित विशाल जनसमूह पर निर्दयता से गोलियाँ बरसाई l फिर मार्शल लॉ लगा दिया गया और लोगों को अमानुषिक दण्ड दिए गए l इससे गाँधी जी के मन में अंग्रेजी सरकार के प्रति दृढ़ विरोध की क्रान्तिकारी भावना जाग उठी l 1920 में गाँधी जी द्वारा बनाया गया क्रान्तिकारी कांग्रेस विधान स्वीकार हुआ l गाँधी जी ने असहयोग आन्दोलन चलाया l 1925 में अखिल भारतीय चरखा संघ की स्थापना की l

1928 में साइमन कमीशन का जोरदार विरोध किया l लाहौर में पंजाब केसरी लाला लाजपत रॉय अंग्रेजी सरकार के आदेश से चलाई हुई लाठियों से शहीद हुए l

26 जनवरी 1930 को लाहौर में हुए कांग्रेस अधिवेशन में पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव पास किया गया l महात्मा गाँधी ने सरकारी आज्ञा-भंग आन्दोलन चालू कर दिया l गाँधी जी 12 मार्च 1930 को दांडी के लिए ऐतिहासिक कूच किया और दांडी में नमक बनाकर सरकारी कानून का उल्लंघन किया l गाँधी जी को पकड़ कर जेल में डाल दिया गया l देश में विदेशी माल के विरूद्ध जबरदस्त आन्दोलन हुआ l सरकार की दमन की नीति ने आन्दोलन को और भड़काया l गाँधी जी के अनुयायियों ने अहिंसात्मक संग्राम जारी रखा l

23 मार्च 1931 को महान देशभक्त भगत सिंह को फाँसी दे दी गई l बापू ने अपने को पूरी तरह रचनात्मक कार्यों में लगाकर यंग इण्डिया, नवजीवन, हरिजन आदि अखबार निकाले l खादी, ग्रामो उद्योग, नयी तालीम और हिन्दू-मुस्लिम एकता के प्रचार से देश में चेतना उत्पन्न कर दी l

1938 में भयंकर आन्दोलन छिड़ा l गाँधी जी ने अहिंसात्मक युद्ध का नारा दिया - "करो या मरो", "अंग्रेजों भारत छोडो" l देश भर में हजारों गिरफ्तारियाँ हुई l गाँधी जी को आगा खां पैलेस में बंदी बना कर रखा गया l वहाँ उन्होंने 21 दिन का उपवास किया l 1944 में गाँधी जी की पत्नी कस्तूरबा जी का देहांत हो गया l गाँधी जी को रिहा कर दिया गया l

1946 में पूर्वी बंगाल में सांप्रदायिक दंगे हुए l गाँधी जी ने शांति स्थापित करने के लिए पैदल नोवाखी की यात्रा की l

15 अगस्त 1947 को अंग्रेज भारत छोड़ गए , देश आजाद हो गया l गाँधी जी का देश को दासत्व से मुक्त करने का जीवन भर का प्रयास सफल हुआ l

30 जनवरी 1948 को जब गाँधी जी प्रार्थना सभा में जा रहे थे, तो अतिवादी, हिंसा द्वारा अपना लक्ष्य प्राप्त करने वाले लोगों में से एक , नाथूराम गोडसे ने उनको तीन गोलियाँ मारी l वे 'हे  राम' कहते जमीन पर गिर गए l यह शोक समाचार सुनकर सारा संसार शोक मग्न हो गया l हमारे प्रिय नेता जिन्हें हम प्यार से 'बापू' कहते थे हमारे बीच नहीं रहे l

आज हम सब लोग उनके जन्म दिवस 2 अक्टूबर और शहादत दिवस 30 जनवरी को उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हैं l और, उनके बताये हुए उच्च आदर्शों वाले मार्ग पर चलने की प्रतिज्ञा करते हैं l


Share This Article

Add Comments


EmoticonEmoticon