महात्मा गाँधी का जीवन इतिहास - Hindi Essay on Life's History of Mahatma Gandhi

History of Mahatma Gandhi
समस्त संसार महात्मा गाँधी को उनके देश प्रेम, त्याग, सत्य, तपस्या, अहिंसा, करुणा, मैत्री भाव, ईमानदारी तथा निष्कपट व्यवहार के लिए जानता है l भारत की स्वतंत्रता के लिए उनका अपना एक विशेष प्रकार का संघर्ष रहा, जिसे सत्य और अहिंसा का मार्ग कहा जाता है l इस हिन्दी लेख के जरिये महात्मा गाँधी के जीवन इतिहास को क्रमबद्ध संकलित करने का प्रयास किया गया है l तो पेश है hindi essay on life's history of Mahatma Gandhi.


राष्ट्रीय स्वतंत्रता के अमर सेनानायक, राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गाँधी था l इनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 ईo को गुजरात के काठियावाड़ प्रायद्वीप के तट पर स्थित पोरबंदर नामक नगर में हुआ था l इनके पिता श्री करमचंद जी पोरबंदर के दीवान और इनकी माता श्रीमति पुतलीबाई बड़ी धर्म परायण महिला थी l

उन्होंने 1876 से 1888 तक पोरबंदर, राजकोट और भावनगर में शिक्षा ग्रहण की l गाँधी जी का विवाह मात्र 13 वर्ष की आयु में श्रीमति कस्तूरबा जी से हो गया l इसी बीच फिर 1885 में उनके पिता जी परलोक सिधार गए l  04 सितम्बर 1888 में कानून की शिक्षा प्राप्त करने के लिए वे विलायत गए, वहाँ से वकालत पास करके वे 12 जून 1891 में भारत लौटे l तब उनकी माता जी का देहांत हो गया l
1892 में गाँधी जी ने राजकोट और बम्बई में वकालत आरम्भ की l 1893 में किसी केस की पैरवी में वे दक्षिण अफ्रीका गए l वहाँ गोरों का भारतीयों और अफ्रीकी लोगों के प्रति दुर्व्यवहार देखकर उन्होंने नेशनल इण्डियन कांग्रेस संगठित की l इसी बीच वे भारत आकर बाल गंगाधर तिलक, गोपाल कृष्ण गोखले और अन्य नेताओं से मिले l 1899 में उन्होंने बोर युद्ध में अंग्रेजों की सहायता की l 1901 में भारत आकर राजकोट में प्लेग - पीड़ित की सेवा की l फिर कलकता कांग्रेस के अधिवेशन में सम्मिलित हुए l 1902 में वर्मा और समस्त भारत का दौरा किया l पुनः दक्षिण अफ्रीका गए, ट्रान्सवाल इण्डिया एसोसिएशन बनाई और इण्डियन नाम का पत्र चलाया l

1906 में जूलू विद्रोह में घायलों की सेवा की और 1907 में सत्याग्रह आरम्भ किया l 1908 में बंदी बनाये गए l 1909 में इन्होंने सुप्रसिद्ध रुसी लेखक एवं समाज सुधारक महात्मा टोलस्टाय से पत्र व्यवहार किया और 1910 में टोलस्टाय फार्म स्थापित किया l सत्याग्रह 1914 तक चलता रहा l कारागार वास और कई-कई दिनों के उपवास के फलस्वरूप जब उन्हें सफलता प्राप्त हुई तब गाँधी जी इंगलैंड गए l उन्हीं दिनों पहला विश्वयुद्ध छिड़ गया l गाँधी जी ने अंग्रेजों की सहायता की l

1918 में रौलट एक्ट के विरोध में गांधीजी के आह्वान पर देश भर में प्रार्थना और उपवास किया गया l 13 अप्रैल 1919 को अंग्रेजी सरकार ने जालियाँवाला बाग़ में एकत्रित विशाल जनसमूह पर निर्दयता से गोलियाँ बरसाई l फिर मार्शल लॉ लगा दिया गया और लोगों को अमानुषिक दण्ड दिए गए l इससे गाँधी जी के मन में अंग्रेजी सरकार के प्रति दृढ़ विरोध की क्रान्तिकारी भावना जाग उठी l 1920 में गाँधी जी द्वारा बनाया गया क्रान्तिकारी कांग्रेस विधान स्वीकार हुआ l गाँधी जी ने असहयोग आन्दोलन चलाया l 1925 में अखिल भारतीय चरखा संघ की स्थापना की l

1928 में साइमन कमीशन का जोरदार विरोध किया l लाहौर में पंजाब केसरी लाला लाजपत रॉय अंग्रेजी सरकार के आदेश से चलाई हुई लाठियों से शहीद हुए l

26 जनवरी 1930 को लाहौर में हुए कांग्रेस अधिवेशन में पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव पास किया गया l महात्मा गाँधी ने सरकारी आज्ञा-भंग आन्दोलन चालू कर दिया l गाँधी जी 12 मार्च 1930 को दांडी के लिए ऐतिहासिक कूच किया और दांडी में नमक बनाकर सरकारी कानून का उल्लंघन किया l गाँधी जी को पकड़ कर जेल में डाल दिया गया l देश में विदेशी माल के विरूद्ध जबरदस्त आन्दोलन हुआ l सरकार की दमन की नीति ने आन्दोलन को और भड़काया l गाँधी जी के अनुयायियों ने अहिंसात्मक संग्राम जारी रखा l

23 मार्च 1931 को महान देशभक्त भगत सिंह को फाँसी दे दी गई l बापू ने अपने को पूरी तरह रचनात्मक कार्यों में लगाकर यंग इण्डिया, नवजीवन, हरिजन आदि अखबार निकाले l खादी, ग्रामो उद्योग, नयी तालीम और हिन्दू-मुस्लिम एकता के प्रचार से देश में चेतना उत्पन्न कर दी l

1938 में भयंकर आन्दोलन छिड़ा l गाँधी जी ने अहिंसात्मक युद्ध का नारा दिया - "करो या मरो", "अंग्रेजों भारत छोडो" l देश भर में हजारों गिरफ्तारियाँ हुई l गाँधी जी को आगा खां पैलेस में बंदी बना कर रखा गया l वहाँ उन्होंने 21 दिन का उपवास किया l 1944 में गाँधी जी की पत्नी कस्तूरबा जी का देहांत हो गया l गाँधी जी को रिहा कर दिया गया l

1946 में पूर्वी बंगाल में सांप्रदायिक दंगे हुए l गाँधी जी ने शांति स्थापित करने के लिए पैदल नोवाखी की यात्रा की l

15 अगस्त 1947 को अंग्रेज भारत छोड़ गए , देश आजाद हो गया l गाँधी जी का देश को दासत्व से मुक्त करने का जीवन भर का प्रयास सफल हुआ l

30 जनवरी 1948 को जब गाँधी जी प्रार्थना सभा में जा रहे थे, तो अतिवादी, हिंसा द्वारा अपना लक्ष्य प्राप्त करने वाले लोगों में से एक , नाथूराम गोडसे ने उनको तीन गोलियाँ मारी l वे 'हे  राम' कहते जमीन पर गिर गए l यह शोक समाचार सुनकर सारा संसार शोक मग्न हो गया l हमारे प्रिय नेता जिन्हें हम प्यार से 'बापू' कहते थे हमारे बीच नहीं रहे l

आज हम सब लोग उनके जन्म दिवस 2 अक्टूबर और शहादत दिवस 30 जनवरी को उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हैं l और, उनके बताये हुए उच्च आदर्शों वाले मार्ग पर चलने की प्रतिज्ञा करते हैं l


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